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UP Assembly Session : विधानसभा में मानसून सत्र के आखिरी दिन अखिलेश ने किसानों के मुद्दें पर सरकार को घेरा

Fri, 11 Aug 2023 07:25 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 11 Aug 2023 07:25 PM IST
सार

अखिलेश ने आवारा पशुओं के मुद्दे को जोर से उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आप इस पर काम क्यों नहीं कर रहे है। क्या आपके पास बजट की कमी है। अगर कुछ नहीं हो सकता है तो कम से कम सांड सफारी ही बना लें।

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UP Assembly Session: Akhilesh surrounded the government on the issue of farmers
सदन में अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानसून सत्र के अखिरी दिन विधानसभा में अखिलेश यादव ने महंगाई पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आलू का भाव नहीं मिल रहा अगर अभी कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं निकला तो आलू के भाव कहां जाएगा। डेरी सेक्टर मदद कर सकता है किसानों की आए बढ़ाने के लिए। इस सेक्टर को बजट देकर इसे बेहतर बनाया गया। इस सरकार ने कहा कि गाय का दूध का क्या करना है, हम भेंस का दूध लेंगे। आज स्थिति ऐसी है कि वो डेरी प्लांट बंद है। 

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मेरठ के लोग जानते हैं 236 करोड़ दिए गए थे। क्या डेरी प्लांट आज चल रहे हैं? अब सुनने में आ रहा है कि डेरी प्लांट को प्राइवेट कंपनियों को देने की तैयारी की जा रही है। इस तरह आप कैसे किसानों की मदद करेंगे। मेरठ का प्लांट तो बंद हो गया। उत्तर प्रदेश की सरकार बताए उत्तर प्रदेश के अंडे का मार्केट क्या है और कितना बाहर से मंगाया जा रहा है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है अगर सरकार 1 ट्रिलियन की इकनॉमी का सपना देख रहे हैं तो आपको इस पर काम करना होगा।
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इसके साथ ही अखिलेश ने गुलदार और टाइगर का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि किसान इस कारण से खेतों में काम नहीं कर पा रहा है। इन्होंने कम से कम 40 लोगों की जान ली और अभी तो मैं साड़ की बात नहीं कर रहा। अगर किसान डर के कारण छह सात महिने से किसान खेत में नहीं जा  पा रहे हैं तो ये सरकार कर क्या रही है? इससे संबंधित विभाग कर क्या रहा है? पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 40 लोगों की जान चली गई। आखिर सरकार कर क्या रही है। समाजवादी सरकार में उन्हें सरकार की ओर से मुआवजा देती थी वो भी 10 से  15 लाख रुपये।
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सांड सफारी ही बनवा दीजिए

अखिलेश ने आवारा पशुओं के मुद्दे को जोर से उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आप इस पर काम क्यों नहीं कर रहे है। क्या आपके पास बजट की कमी है। अगर कुछ नहीं हो सकता है तो कम से कम सांड सफारी ही बना लें। ऐसा कोई जिला नहीं बचा जहां पर सांड से किसी की जान न गई होगी। संभल, मुरादाबाद, चंदौसी, मुरादाबाद, हसनपुर और कितने नाम बताऊं आपको जहां सांड के हमले से जान न गई हो।

पिछली बार मैंने इनके हमले से मरने वालों की सूची सरकार को सौंपी थी लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की गई है। अखिलेश बोली मैं चाहता हूं सरकार इस पर काम करे ताकि लोगों की जान बच सके।
सरकार उन लोगों की मदद करे और उनके परिवारों को 1 करोड़ की मदद करें। जो लोग भी हिंसा में मारे गए हैं उनको सरकारी नौकरी भी दें। इस दौरान ये न देखें कि वो किस धर्म का है। सभी की मदद होनी चाहिए। उन्होंने एक किसान की मौत का मुद्दा उठाया और कहां कि जो लोग सूखे के कारण आत्महत्या कर रहे हैं उनकी आर्थिक मदद क्यों नहीं करते।

आप हमें सपना दिखा रहे हैं कि हम बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं और एक तरफ बासमती राइज पर बैन लगा दिया है। ये आपका बस नारा है कि हम किसानों की आय दोगुनी करेंगे। आप ऐसा कैसे करेंगे ये बस कहने की बात है। अगर किसान अपनी जमीन दे रहा है तो आप उस पर बिजनेस करेंगे और मुनाफा कमाएंगे तो आप किसानों की मदद क्यों नहीं कर रहे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आप सर्किल रेट को क्यों नहीं बड़ा देते। खजाना खाली होगा तो एक बार फिर भर जाएगा।

अयोध्या में किसानों की ली गई जमीन का क्या हुआ? 

अयोध्या के किसानों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि आप परिक्रमा मार्ग बदल रहे हैं। उन किसानों का क्या होगा जिनकी जमीन आप ले रहे हैं। वहां पर जो पेड़ लगे है वो भी काटे जा रहे हैं, क्या आप उनको ट्रांस लोकेट नहीं कर सकते हैं। मेरा आपसे निवेदन है उन्हें न काटे। पेड़ लगाने का काम सरकार कागज पर बहुत अच्छा करती है। इन्होंने करोड़ों पेड़ लगाए, मुझे तो नहीं दिखते पता नहीं कहां लगाए हैं।

क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम का क्या हुआ। प्रधानमंत्री जी ने कब इसके बारे में कहा था। बताइए आपने इसके माध्यम से कितने किसानों की मदद की। आज बिजली की हालत क्या है? इसमें मंत्री जी दोषी नहीं है। इतने ट्रांसफॉर्मर फुक रहे हैं कि कहां बन रहे हैं ये ट्रांसफॉर्मर। आप बताइए आपने पिछले साढ़े छह कौन सा पावर प्लांट लगाया है जिससे उत्तर प्रदेश की बिजली की समस्या को दूर किया जा सकता है।

इस तरह से कैसे बिजली की व्यवस्था ठीक होगी। बीजेपी एक शब्द का बहुत इस्तेमाल करती है और वो है परिवारवाद। परिवारवाद के सही शुरूआत तो आपने की आप मठ के पीठाधिकारी है और सीएम का भी पद आपके पास है।

क्या आपको अस्पतालों की हालत नजर नहीं आती। यूपी के बहराइच में डॉक्टर की जगह पहुंचा सांड़, सरकारी अस्पतालों में सरकारी बेड पर मिले कुत्ते सोते हुए। किस जिले का बताऊं बताएं आप। कोई ऑपरेशन नहीं करा पा रहा है, सरकारी अस्पतालों में भीड़ देखने लायक है। दवाई नहीं, इंतजाम नहीं, डॉक्टर नहीं आखिर आप कर रहे हैं।

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