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यूपी विधानसभा उप चुनाव: विधानसभा की सात सीटों से भाजपा के उम्मीदवार घोषित, देवरिया सीट से ये हुए प्रत्याशी

Tue, 13 Oct 2020 05:56 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 13 Oct 2020 05:56 PM IST
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UP Assembly by-election: BJP declared candidates for six seats
फाइल फोटो - फोटो : social media

भाजपा ने काफी विचार-विमर्श के बाद मंगलवार को उपचुनाव वाली विधानसभा की सात सीटों में से सातों के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। देवरिया में भाजपा ने ब्राह्मण चेहरा सत्यप्रकाश मणि को उम्मीदवार बनाया है।

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उम्मीदवारों में जौनपुर की मल्हनी सीट छोड़कर शेष सभी पर भाजपा ने पुराने कार्यकर्ताओं लेकिन नए चेहरों पर भरोसा जताया है। इनमें सभी पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे।
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बुलंदशहर सीट पर दिवंगत विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही की पत्नी ऊषा सिरोही और अमरोहा की नौगावां सादात पर दिवंगत विधायक व योगी सरकार में मंत्री रहे स्व. चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान पर भरोसा जताया है। 
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फिरोजाबाद की टूंडला सीट से प्रेमपाल धनगर, उन्नाव की बांगरमऊ सीट से श्रीकांत कटियार, कानपुर की घाटमपुर सीट से उपेंद्र पासवान और जौनपुर की मल्हनी सीट से मनोज सिंह को उम्मीदवार घोषित किया गया है।


बुलंदशहर: इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और कई बार मंत्री रहे वीरेन्द्र सिंह सिरोही के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। यहां से टिकट मांगने वालों की लंबी लाइन थी। स्व. सिरोही के दो पुत्रों में ही खींचतान मची होने की खबर थी। 

भाजपा नेतृत्व ने स्व. सिरोही की पत्नी ऊषा सिरोही  की टिकट देकर न सिर्फ पारिवारिक खींचतान और स्थानीय गुटबाजी से बचने की कोशिश की है बल्कि सिरोही जैसे पुराने कार्यकर्ता और नेता के प्रति समर्पण दिखाकर लोगों को लामबंद करने और सहानुभूति का लाभ लेने की भी कोशिश की है ।

नौगावां सादात: अमरोहा की नौगावां सादात सीट पर भी प्रदेश सरकार में मंत्री और क्र्तिकेटर चेतन चौहान के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है । भाजपा ने स्व. चौहान की जगह उनकी पत्नी संगीता को उम्मीदवार बनाकर न सिर्फ  चेतन के प्रति समर्पण का संदेश दिया है बल्कि यहां भी सहानुभूति के समीकरण को दुरुस्त  रखने की कोशिश की है। साथ ही चुनाव को गुटबाजी से बचाने की कोशिश की है।

घाटमपुर: कानपुर की घाटमपुर सीट पर उपचुनाव की वजह भी यहां से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री कमलरानी वरुण की आकस्मिक मृत्यु है। इस सीट पर भाजपा से उम्मीदवार घोषित उपेंद्र पासवान पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। वह इस समय भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के कानपुर क्षेत्र के अध्यक्ष हैं। माना जाता है कि इस सीट पर उपेंद्र को उम्मीदवार बनाकर परिवारवाद के आरोप से भी बचने की कोशिश की गई है। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि भाजपा में किसी नेता की किसी सीट पर परंपरागत विरासत नहीं चल सकती। यहां से स्व. कमलरानी की पुत्री भी  टिकट मांग रही थीं।
 

टूंडला: फिरोजाबाद की टूंडला सीट पर भी भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ता और  इस समय ब्रज क्षेत्र में क्षेत्रीय मंत्री के रूप में काम कर रहे प्रेमपाल धनगर भरोसा जताया है। पूर्व मंत्री और 2017 में  यहां से भाजपा विधायक चुने गए तथा अब सांसद डॉ. एस.पी. सिंह बघेल अपनी पुत्री सलोनी की राजनीतिक पारी शुरू कराना चाहते थे। 

पर, पार्टी ने यहां भी परिवारवाद के आरोप से बचे रहने और साथ ही यह संदेश साफ  रखने के लिए कि भाजपा में कहीं भी कोई राजनीतिक विरासत नहीं चल सकती, नए चेहरे को मैदान में उतारा है ।

बांगरमऊ: यहां से भाजपा के उम्मीदवार घोषित श्रीकांत कटियार भी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। वह पार्टी में कई पदों पर रहने के साथ भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। इस सीट पर 2017 में भाजपा से कुलदीप सिंह सेंगर चुने गए थे लेकिन रेप कांड में उम्रकैद की सजा होने के कारण उनकी सदस्यता रद्द हो गई। इसलिए यहां पर उपचुनाव हो रहा है। 

इस सीट पर तमाम लोगों के साथ कुलदीप की पत्नी भी टिकट की दावेदार थीं लेकिन भाजपा ने नए चेहरे और पुराने कार्यकर्ता को मैदान में उतारकर जहां सेंगर के कारण पार्टी की छवि पर उछलने वाली छीटों से बचने की कोशिश की है वहीं यहां भी परिवारवाद का प्रभाव न चलने देने का संदेश दिया है । साथ ही पिछड़ा चेहरा उतारकर यहां की पिछड़ी जातियों की पार्टी के साथ लामबंदी की कोशिश की है ।

मल्हनी: इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष रहे छात्र नेता मनोज सिंह को भाजपा ने जौनपुर के मल्हनी से उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर सपा के पारसनाथ यादव के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। सिंह  वैसे तो काफी दिनों से भाजपा में हैं लेकिन इससे पहले वे दूसरे दलों में भी रह चुके हैं। हालांकि वे छात्रनेता रहे हैं लेकिन जहां तक विधानसभा चुनाव का सवाल है तो वह भी पहली बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उनकी पत्नी बरसठी  की  ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं।
 
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