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यूपी: बिजली कर्मियों पर केस दर्ज करने से बढ़ा आक्रोश, दो जुलाई को देशव्यापी आंदोलन की तैयारी

Sat, 28 Jun 2025 10:12 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 28 Jun 2025 10:12 PM IST
सार

Power crisis in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण का मामला अब आक्रामक होता जा रहा है। दो कर्मचारियों पर केस दर्ज होने के बाद बिजली कर्मियों ने इस मामले में देशव्यापी आंदोलन की बात कही है। 

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UP: Anger increased after filing case against electricity workers, preparations for nationwide agitation on Ju
यूपी में बिजली व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कार्मिकों पर विजिलेंस में रिपोर्ट दर्ज कराने, मनमानी तरीके से हुए तबादले और विभिन्न मामलों में हुई कार्रवाई से बिजली कर्मियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बिजली कर्मियों ने पॉवर काॅर्पोरेशन प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसके साथ ही दो जुलाई को होने वाले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की तैयारी तेज कर दी है।

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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से शनिवार को भी विभिन्न जिलों एवं परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसमें अभियंताओं पर विजिलेंस रिपोर्ट दर्ज कराने की निंदा की गई। प्रबंधन पर आपातकाल जैसा वातावरण बनाने का आरोप लगाया गया। इसी क्रम में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की बैठक में पॉवर काॅर्पोरेशन प्रबंधन और शासन के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया और दमनकारी रवैया के विरोध में दो जुलाई को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा कि कई अन्य नेताओं पर भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
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दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं में आक्रोश
पाॅवर ऑफिसर्स एसोसिएशन की शनिवार को फील्ड हास्टल में हुई बैठक में पाॅवर काॅर्पोरेशन प्रबंधन पर दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं को चिह्नित करके निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण को लेकर सभी संगठन विरोध कर रहे हैं। काॅर्पोरेशन प्रबंधन की ओर से संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। इसमें भी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं को चिह्नित करके कार्रवाई की जा रही है। प्रबंधन का यह कदम अभियंताओं को उकसाने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली और स्थानांतरण नियमावली का उल्लंघन करके उत्पीड़न बंद नहीं किया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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