यूपी : शर्तें पूरी नहीं होने पर रुकेगा संबंधित पंचायत को अनुदान आवंटन, ये हैं शर्तें...
नए ग्राम प्रधानों के लिए 15वें वित्त आयोग ने अनुदान आवंटन के साथ कई शर्तें लगा दी हैं। खास बात यह भी है कि शर्त पूरी नहीं होने पर संबंधित पंचायत का केंद्र से आवंटन बंद हो जाएगा।
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नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों को पहले दिन से ही रणनीति बनाकर काम करना होगा। 15वें वित्त आयोग ने अनुदान आवंटन के साथ कई शर्तें लगा दी हैं। यही नहीं, शर्त पूरी न हुई तो संबंधित पंचायत का केंद्र से आवंटन बंद हो जाएगा।
15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों पर ग्रामीण स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत) को बड़ी धनराशि मिलती है। चालू वित्त वर्ष 2021-22 से अगले 5 वर्षों के लिए आवंटन राशि तय हो चुका है। ग्रामीण स्थानीय निकायों को पांच वर्ष में कुल 38,012 करोड़ रुपये मिलना है। इनमें से 70 फीसदी धनराशि (26,608 करोड़) ग्राम पंचायतों के लिए तय है। इसे पाने के लिए पंचायतों को अपने खर्च का ऑडिट कराने और उसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दो बड़ी शर्तें जोड़ी गई हैं। राज्य स्तर पर इसे दो चरण में पूरा किया जाना है। इस कार्यवाही में चूक से पंचायतों का आवंटन ही रुक जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2021-22 व 2022-23 के लिए शर्तें
पंचाट अवधि (5 वर्ष) के पहले और दूसरे वर्ष में राज्यों को यह सुनिश्चित करना है कि उनके कम से कम 25% ग्रामीण स्थानीय निकायों के पास पिछले वर्ष के अंतिम लेखा और पिछले से पिछले वर्ष के लिए लेखापरीक्षित लेखा सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध हो। तभी वे इन वर्षों में पूर्ण अनुदान प्राप्त कर सकेंगे।
निवर्तमान प्रधानों के दो वर्ष के काम की होगी ऑडिट
लेखा परीक्षा को सख्ती से लागू करने का सीधा असर पिछले दो वित्तीय वर्ष में निवर्तमान ग्राम प्रधानों द्वारा कराए गए कार्यों पर दिखेगा। यह शिकायत मिली है कि बड़ी संख्या में निवर्तमान ग्राम प्रधानों ने बिना काम कराए ही प्रस्तावित कार्यों से जुड़ी धनराशि निकाल ली है। जहां प्रधान बदल गए हैं या विरोधी आ गए हैं, वहां ऑडिट में इस तरह की बात सही पाए जाने पर निवर्तमान प्रधानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के लिए शर्तें
ग्रामीण स्थानीय निकायों को वर्षवार मिलने वाला आवंटन
वित्तीय वर्ष आवंटन (करोड़ रुपये में)
2021-22 7,208
2022-23 7,466
2023-24 7,547
2024-25 7,994
2025-26 7,797