UP: योगी के 'टोंटी वाले' तंज पर अखिलेश यादव का तीखा पलटवार, बोले- सीएम यानी 'करप्ट माउथ'
मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी नेता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक मंच पर कई सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के अतीत, राजनीतिक सफर और उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर निशाना साधा। बयानबाजी के इस दौर ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विस्तार
अखिलेश यादव ने सीएम योगी के टोंटी वाले तंज पर पलटवार किया है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट से लिखा- विज्ञान कहता है कि किशोरावस्था में किया गया वनस्पति का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है।
वहीं, मनोविज्ञान कहता है कि बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं। CM के “करप्ट माउथ” होने की वजह शायद यही है। जिन्हें CM का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है।
CM यानी करप्ट माउथ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 5, 2026
• ANI पर गाली।
• सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसे वयोवृद्ध को अभद्र शब्दों से संबोधित किया।
• गुरुजनों से अभद्र वाचिक व्यवहार
• मंच से गाली।
• और अब भाषण का यह निम्न स्तर।
आख़िर क्यों?
विज्ञान कहता है की किशोरावस्था में किया गया “वनस्पति” का अत्यधिक सेवन… pic.twitter.com/N3r2Sltv9J
अखिलेश यादव ने इन मुद्दों पर कसा तंज
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया
उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी। स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी?
डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए? और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
पढ़ें सीएम योगी का दिया बयान
दरअसल, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर मंच से संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए सियासी चुटकी ली थी। सीएम योगी ने कहा था, "हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है। कोई टोंटी खुली छोड़ दे रहा है।
जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहें। कोई पानी बर्बाद कर रहा है, तो ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं।" यह बयान देते हुए मुख्यमंत्री मंद-मंद मुस्कुराते भी नजर आए थे, जिसे वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने तुरंत सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगे पुराने 'टोटी चोरी' के आरोपों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।