यूपी: 62 लाख रुपये के एलआईसी घोटाले का आरोपी अरेस्ट, CBI टीम ने लखनऊ मेट्रो स्टेशन से पकड़ा
एलआईसी घोटाले में फरार आरोपी को सीबीआई ने लखनऊ मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया। आरोप है कि फर्जी पॉलिसी और नकली चेक के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई। पहले जमानत पर छूटकर फरार हो गया था, जिसे बाद में पकड़कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
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सीबीआई ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ 62 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले भगोड़े आरोपी समीर जोशी को मंगलवार को राजधानी स्थित हजरतगंज के मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। उसे स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
सीबीआई के मुताबिक 13 अगस्त 2012 को एलआईसी के अधिकारियों ने शिकायत की थी कि कुछ आरोपियों ने फर्जी पॉलिसी धारकों के नाम पर फर्जी चेक बनाकर एलआईसी निधि का दुरुपयोग किया। उन्होंने खातों में हेराफेरी करके फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के दौरान एलआईसी, जानकीपुरम शाखा में 6,37,66,660 रुपये की धोखाधड़ी अंजाम दी।
सीबीआई ने इस मामले की जांच के बाद 21 अगस्त 2014 को समीर जोशी सहित 12 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। समीर के खिलाफ 62 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप पत्र दाखिल किया गया था। उसने एलआईसी के तत्कालीन अधिकारी पंकज सक्सेना की मिलीभगत से 62 लाख रुपये का गबन किया था। इसमें समीर जोशी की पत्नी अंजू जोशी और उसके कर्मचारी जितेंद्र कुमार की संलिप्तता सामने आई थी।
इन सभी ने 62 लाख रुपये के फर्जी एलआईसी के चेक बनाकर उनको भुना लिया और पूरी रकम आपस में बांट ली। जांच के दौरान आरोपी समीर जोशी को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उसे जमानत मिल गई। अदालत में सुनवाई शुरू होने पर वह जमानत तोड़कर फरार हो गया। जिसके बाद सीबीआई के अनुरोध पर अदालत ने उसे 24 दिसंबर 2025 को भगोड़ा घोषित किया था।