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यूपी : रजिस्ट्री वेबसाइट पर सार्वजनिक हो रहे थे आधार नंबर, फिंगर प्रिंट, धोखाधड़ी की आशंका

Fri, 26 Nov 2021 04:19 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 26 Nov 2021 04:19 PM IST
सार

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के आपत्ति जताने के बाद शासन ने सभी संबंधित विभागों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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UP: Aadhar number, finger print, possibility of fraud being made public on registry website
आधार कार्ड - फोटो : iStock

विस्तार

प्रदेश में आधार अधिनियम-2016 को दरकिनार कर भूमि रजिस्ट्री से संबंधित क्रेता, विक्रेता व गवाहों के समस्त संपत्ति पंजीकरण दस्तावेज रजिस्ट्री वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाने का केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के आपत्ति जताने के बाद शासन ने सभी संबंधित विभागों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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राज्य सरकार तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ आधार नंबर लेने के बाद दे रही है। शासन की भूमि रजिस्ट्री वेबसाइट पर रजिस्ट्री से संबंधित सभी दस्तावेज प्रदर्शित किए जा रहे थे। इससे क्रेता-विक्रेता व गवाहों के आधार कार्ड की प्रति व फिंगर प्रिंट्स आसानी से किसी को भी उपलब्ध हो जा रही थी। ऐसे में बायोमीट्रिक क्लोनिंग के जरिए धोखाधड़ी की आशंका बढ़ गई थी। यूआईडीएआई के  मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सौरभ गर्ग ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने इस संबंध में मुख्य सचिव आरके तिवारी को एक पत्र लिखा है। 
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गर्ग ने आधार अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में फिंगर प्रिंट व आधार कार्ड को सार्वजनिक किए जाने पर वित्तीय धोखाधड़ी हो सकती है। बायोमीट्रिक क्लोनिंग की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया है कि यदि इन अभिलेखों को सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है तो किस तरह और कितने हिस्से को किया जा सकता है और उसके लिए किस प्रक्रिया का पालन किया जाए। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  सीईओ का पत्र आने के बाद स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने वेबसाइट से इन दस्तावेजों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगा दी है।
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किसी दशा में प्रदर्शित न किए जाएं आधार के पूरे 12 अकं
यूआईडीएआई के  सीईओ ने कहा है कि आधार के पूरे 12 अंक किसी भी दशा में प्रदर्शित न किए जाएं। अगर बहुत आवश्यक है तो अंतिम चार नंबर ही जारी किए जाएं। बायोमीट्रिक सूचनाएं किसी भी दशा में पब्लिक डोमेन में जारी न की जाएं। यदि जरूरी है तो वाटरमार्क पर होना चाहिए, जिससे इसका दुरुपयोग न हो सके। यदि रजिस्ट्री की सत्य प्रतिलिपि उचित कारण पर दिया जाना आवश्यक है तो वाटरमार्क पर आधार नंबर को छिपाते हुए जारी किया जाएगा।

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