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Lucknow News: नए दौर में तकनीक के साथ कदमताल कर रही हिंदी
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लविवि के उमा कृष्ण अवस्थी सभागार में हिंदी दिवस पर प्रश्नोत्तरी क्लब ‘तथ्यम’ की ओर से दो प्रश्न
लखनऊ। हिंदी दिवस के मौके पर विश्वविद्यालयों से लेकर कॉलेजों तक में गोष्ठियों, व्याख्यानों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से हिंदी के महत्व पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नए दौर में तकनीक के साथ हिंदी कदमताल कर रही है। शिक्षकों और छात्रों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि बदलते तकनीकी दौर में जब इंटरनेट, सोशल मीडिया और एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है तो ऐसे समय में हिंदी की पहुंच भी बड़े जनसमूह तक पहुंच रही है।
हिंदी में 350 से अधिक बोलियां : प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर ''राष्ट्र के विकास में हिंदी की भूमिका'' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि लविवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने बताया कि विश्वभर में 16,000 से अधिक बोलियां प्रचलित हैं, हिंदी में 350 से अधिक बोलियां शामिल हैं। वरिष्ठ साहित्यकार संजीव जायसवाल ने कहा कि योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में भाषा सबसे प्रभावी माध्यम है। एमटीएस कर्मचारियों के लिए सुलेख प्रतियोगिता भी हुई। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि हिंदी, रोजगार और उद्यमिता का सशक्त माध्यम बन रही है।
फोटो-
सोशल मीडिया के जरिये दूर तक पहुंच रही हिंदी
भाषा विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने ‘डिजिटल और एआई युग में हिंदी भाषा और मीडिया के बदलते आयाम’ विषय पर हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर आराधना अस्थाना ने कहा कि सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और पॉडकास्ट के जरिये हिंदी सामग्री बड़े जनसमूह तक पहुंच रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पत्रकारिता में कंटेंट रिसर्च, लेखन, संपादन और डाटा विश्लेषण में उपयोगी बताया। कुलपति प्रो. अजय तनेजा के निर्देशन में हुए आयोजन का संयोजन डॉ. रुचिता सुजय चौधरी व सह संयोजन डॉ. शचींद्र शेखर और डॉ. काजिम रिजवी ने किया।
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हिंदी में 350 से अधिक बोलियां : प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर ''राष्ट्र के विकास में हिंदी की भूमिका'' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि लविवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने बताया कि विश्वभर में 16,000 से अधिक बोलियां प्रचलित हैं, हिंदी में 350 से अधिक बोलियां शामिल हैं। वरिष्ठ साहित्यकार संजीव जायसवाल ने कहा कि योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में भाषा सबसे प्रभावी माध्यम है। एमटीएस कर्मचारियों के लिए सुलेख प्रतियोगिता भी हुई। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि हिंदी, रोजगार और उद्यमिता का सशक्त माध्यम बन रही है।
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सोशल मीडिया के जरिये दूर तक पहुंच रही हिंदी
भाषा विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने ‘डिजिटल और एआई युग में हिंदी भाषा और मीडिया के बदलते आयाम’ विषय पर हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर आराधना अस्थाना ने कहा कि सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और पॉडकास्ट के जरिये हिंदी सामग्री बड़े जनसमूह तक पहुंच रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पत्रकारिता में कंटेंट रिसर्च, लेखन, संपादन और डाटा विश्लेषण में उपयोगी बताया। कुलपति प्रो. अजय तनेजा के निर्देशन में हुए आयोजन का संयोजन डॉ. रुचिता सुजय चौधरी व सह संयोजन डॉ. शचींद्र शेखर और डॉ. काजिम रिजवी ने किया।
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