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यूपी: सभी जिलों में शुरू होगी पढ़ाई छोड़ श्रम कर रहे बच्चों को स्कूल भेजने की योजना, ये बच्चे हो सकेंगे शामिल

Sun, 24 May 2026 07:11 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 24 May 2026 07:11 AM IST
सार

Child Labour Scheme: बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश के साथ आर्थिक सहायता दी जा रही है।
 

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UP: A scheme to send children who have left their studies and are working in schools will be launched in all d
बाल श्रम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में श्रमिक परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए श्रम विभाग संचालित बाल श्रमिक विद्या योजना को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने का फैसला किया है। योजना के तहत 8 से 18 वर्ष की आयु तक के कामकाजी बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाएगा। वहीं, सेवा मित्र योजना को और प्रभावी बनाते हुए बड़े और औद्योगिक शहरों में श्रमिक सुविधा केंद्रों का विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी श्रमिक परिवार का बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करें। वर्ष 2020 में शुरु बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश के साथ आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्तमान में योजना 20 जिलों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती हैं। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक जहां यह संख्या 14,176 थी, वहीं अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4860 कारखानों का पंजीकरण किया गया।

प्रदेश में बनेंगे श्रमिक सुविधा केंद्र
मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के लिए सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। बैठक में बताया गया कि विष्णुपुरी स्थित जमीन पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला प्रशिक्षण संस्थान प्रस्तावित है, जहां कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त बेनाझाबर स्थित जमीन पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला छात्रावास भी प्रस्तावित है।

बैठक में बताया गया कि रोजगार मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस मिल गया है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें 2300 युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार के लिए हुआ।


बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 3030 रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से 3,74,776 अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। रोजगार मेलों को सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य सहित विभिन्न देशों में रोजगार की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं। जापानी, जर्मन और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने के लिए समझौते किए गए हैं।

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