फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: 2.25 lakh property disputes will be resolved, people will save 3800 crores; decision will be made in five

यूपी: संपत्ति विवाद के 2.25 लाख झगड़े होंगे खत्म, जनता के बचेंगे 3800 करोड़; पांच हजार रुपये में होगा फैसला

Wed, 03 Sep 2025 09:51 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 03 Sep 2025 09:51 PM IST
सार

Property division in UP: योगी सरकार ने पारिवारिक विवादों को खत्म करने का बहुत आसान हल निकाल लिया है। विभाग का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति बंटवारे के करीब 2.25 लाख विवाद मिनटों में खत्म हो जाएंगे। 

विज्ञापन
UP: 2.25 lakh property disputes will be resolved, people will save 3800 crores; decision will be made in five
योगी कैबिनेट ने लगाई थी इस पर मुहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पारिवारिक संपत्तियों के बंटवारे का अधिकतम शुल्क 5 हजार रुपये करने का फैसला न केवल अदालतों का बोझ कम करेगा बल्कि परिवारों में सौहार्द्र का माहौल भी बनाएगा। पहले यह शुल्क संपत्ति के बाजार मूल्य का 5% तक होता था। विभाग का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति बंटवारे के करीब 2.25 लाख विवाद मिनटों में खत्म हो जाएंगे। कानूनी सलाह आदि पर होने खर्च में 3800 करोड़ रुपये तक की बचत होगी और स्टांप राजस्व के रूप में 500 करोड़ तक की वृद्धि होगी। अभी इस मद में कोई राजस्व नहीं मिलता।

विज्ञापन


प्रदेश में फिलहाल राजस्व अदालतों में लगभग 26,866 भूमि व संपत्ति संबंधी विवाद लंबित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या पारिवारिक संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ी है। इसके अलावा करीब दो लाख मामले अलग-अलग रूप में चल रहे हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क घटने से कम-आय वर्ग के लोग भी अब संपत्ति विभाजन का पंजीकरण कराएंगे, जिससे लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। अनुमान है कि 70 फीसदी विवाद एक वर्ष में खत्म हो जाएंगे।
विज्ञापन


संपत्ति विवाद पुलिस थानों और तहसील स्तर पर झगड़ों का कारण बनते हैं। अपंजीकृत बंटवारे से झगड़े लंबा खिंचते थे। अब शुल्क घटने से लोग सीधे पंजीकृत विभाजन की ओर बढ़ेंगे, जिससे पुलिस और तहसील स्टाफ पर भार कम होगा। पहले महंगे शुल्क के कारण लोग बंटवारे से बचते थे, लेकिन अब केवल ₹5,000 की सीमा तय होने से बड़ी संख्या में लोग आगे आएंगे। रजिस्ट्री विभाग का मानना है कि अगर प्रदेश में हर साल औसतन 50,000 पारिवारिक संपत्ति बंटवारे पंजीकृत होते हैं, तो सरकार को इससे कम से कम 500 करोड़ तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। पुराने लंबित मामलों के निस्तारण से भी हजारों पंजीकरण होंगे, जिससे शुरुआती वर्षों में राजस्व में और बढ़ोतरी संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पारिवारिक कलह को खत्म करना मकसद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अ्नुरूप पारिवारिक संपत्ति बंटवारे में न्यूनतम शुल्क की कवायद तीन वर्ष से चल रही थी। इसका सबसे बड़ा मकसद संपत्ति बंटवारे की वजह से परिवारों में होने वाली कलह को खत्म करना है। साथ ही अदालतों में मामले जाने की वजह से संपत्ति का कोई इस्तेमाल सीमित हो जाता है। अब दस हजार की फीस पर दस मिनट पर विवाद हल होगा, जिसका सकारात्मक असर राजस्व पर भी आएगा। -रवीन्द्र जायसवाल, स्टांप एवं पंजीकरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed