‘गंगा के पानी को साफ होने में लगेंगे 10 साल’
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विभिन्न राज्यों में गंगा नदी में गिरने वाले 25 बड़े नालों को 45 दिनों के अंदर बंद (टेप) कर दिया जाएगा। यह घोषणा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को यहां की।
वह गंगा में गिरने वाले नालों का स्टीमर से निरीक्षण करने के बाद सरसैया घाट पर पत्रकारों से वार्ता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि गंगा की सबसे खराब स्थिति कानपुर की है। अब गंगा के तटों की रक्षा के लिए गंगा वाहिनी का गठन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गंगा सफाई अभियान का असर तीन साल में दिखने लगेगा लेकिन गंगाजल को निर्मल होने में कम से कम दस वर्ष का समय लगेगा।
उन्होंने बताया कि गंगा की निर्मलता में 140 नाले सबसे ज्यादा बाधक हैं। हरिद्वार, कानपुर, वाराणसी प्रमुख शहर हैं, जहां काफी सुधार की जरूरत है। गंगा का प्रदूषण केंद्र सरकार की बड़ी चुनौती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि गंगा के तटों की रक्षा के लिए गंगा वाहिनी का गठन किया जाएगा। यह रेडक्रास सोसायटी की तरह काम करेगी।
ली जाएगी टेरिटोरियल आर्मी की मदद
उमा ने कहा कि जिलों में इस वाहिनी का प्रमुख वहां का जिलाधिकारी होगा, जबकि सचिव समाज से चुना जाएगा जो गंगा के लिए कार्य करता हो। आगे चलकर इस कार्य में टेरिटोरियल मिलिट्री की सहायता भी ली जाएगी। गंगा के किनारे पौधे भी लगाए जाएंगे। यह पौधे किस तरह के होने चाहिए, इसके लिए देहरादून स्थित एफआरआई से राय मांगी गई है।
गंगा में अस्थियों के विसर्जन पर रोक नहीं
केंद्रीय मंत्री और गंगा बेसिन अथॉरिटी की उपाध्यक्ष उमा भारती ने कहा कि गंगा में अस्थियों के विसर्जन पर किसी तरह की रोक नहीं होगी। इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं। पहला यह कि गंगा में ऐसे जीव जंतु भी हैं जो इन हड्डियों को खाकर अपना पेट भरते हैं। दूसरा इसका धार्मिक महत्व भी है। इस संबंध में वे अखाड़ों को भी पत्र लिखेंगी।
उमा के अनुसार जैसा उनका फैसला होगा, उस पर आगे विचार किया जाएगा। इसी तरह फल और फूलों के विसर्जन पर भी पाबंदी नहीं रहेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त और साफ सुथरा रखने के लिए इसमें पॉलीथिन फेंकने पर रोक लगायी जाएगी।