{"_id":"69dea883894e6aa5680ef0c6","slug":"ultrasound-tests-at-kgmu-are-dependent-on-ayush-doctors-putting-patients-lives-and-dignity-at-risk-lucknow-news-c-13-lko1070-1690579-2026-04-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: केजीएमयू में आयुष डॉक्टरों के भरोसे अल्ट्रासाउंड जांच, मरीजों की जान और सम्मान दोनों सांसत में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: केजीएमयू में आयुष डॉक्टरों के भरोसे अल्ट्रासाउंड जांच, मरीजों की जान और सम्मान दोनों सांसत में
विज्ञापन
केजीएमयू।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में पीपीपी मॉडल के नाम पर मरीजों की जान और सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है। विभाग में रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टरों के बजाय आयुष विधा के डॉक्टरों से अल्ट्रासाउंड जांच कराई जा रही है। हाल ही में काकोरी निवासी एक महिला मरीज से जांच के दौरान हुई छेड़छाड़ की घटना ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में 12 नियमित और 40 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर तैनात हैं, जो सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्सरे जैसी जटिल जांच करते हैं। इसके बावजूद 20 वर्षों से यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड का काम पीपीपी मॉडल पर निजी एजेंसी को सौंपा गया है। केजीएमयू प्रशासन इस बात से बेखबर है (या जानकर अनजान है) कि इन मशीनों पर जांच करने वाले लोग योग्य रेडियोलॉजिस्ट हैं या नहीं।
गलत रिपोर्ट और छेड़छाड़ का खतरा
नियमों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच केवल रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं, लेकिन यूरोलॉजी विभाग में आयुष डॉक्टर जांच कर रहे हैं। महिला मरीज का आरोप है कि इसी आयुष डॉक्टर ने जांच के बहाने उसके साथ छेड़छाड़ की। घटना के एक सप्ताह बाद भी आरोपी पर कोई कार्रवाई न होना केजीएमयू प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर
केजीएमयू में विशाखा समिति, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद न मरीज सुरक्षित हैं और न ही महिला स्टाफ। आयुष डॉक्टरों द्वारा अवैध रूप से की जा रही जांचें न केवल चिकित्सकीय रूप से जोखिम भरी हैं, बल्कि मरीजों की गरिमा के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि विभाग से जानकारी मांगी गई है। समिति गठित कर जांच कराई जाएगी। आयुष डॉक्टर पर आरोप की पुष्टि होने पर कंपनी पर भी कार्रवाई होगी।
प्रमुख घटनाएं
11 फरवरी 2026 : पीडियाट्रिक विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर ने एडिशनल प्रोफेसर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को निलंबित किया।
13 फरवरी 2026 : असिस्टेंट प्रोफेसर पर महिला डॉक्टर से छेड़छाड़ और मोबाइल पर आपत्तिजनक मेसेज भेजने के आरोप लगे। आरोपी को निलंबित किया गया।
2 जनवरी 2026 : नर्सिंग छात्रा ने एमबीबीएस इंटर्न पर यौन शोषण, शादी का झांसा और धमकी देने के आरोप लगाए। एफआईआर दर्ज कराई गई। छात्र की इंटर्नशिप रद्द की गई।
19 दिसंबर 2025 : पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर पर यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के प्रयास के आरोप लगे। आरोपी गिरफ्तार, दाखिला रद्द।
8 नवंबर 2025 : सीनियर प्रोफेसर ने जूनियर फैकल्टी पर यौन उत्पीड़न व अभद्रता का आरोप लगाया।
17 जनवरी 2025 : मानसिक स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी पर मानसिक रूप से बीमार युवती से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे। केजीएमयू प्रशासन ने संविदा कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था।
21 जून 2024 : एमबीबीएस छात्रा ने हॉस्टल कर्मचारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। एमआईआर की सिफारिश और संबंधित एजेंसी ब्लैकलिस्ट की गई थी।
26 जनवरी 2024 : नर्सिंग अधिकारी ने सहकर्मी पर यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। आरोपी का ट्रांसफर किया गया।
विज्ञापन
हैरानी की बात यह है कि केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में 12 नियमित और 40 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर तैनात हैं, जो सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्सरे जैसी जटिल जांच करते हैं। इसके बावजूद 20 वर्षों से यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड का काम पीपीपी मॉडल पर निजी एजेंसी को सौंपा गया है। केजीएमयू प्रशासन इस बात से बेखबर है (या जानकर अनजान है) कि इन मशीनों पर जांच करने वाले लोग योग्य रेडियोलॉजिस्ट हैं या नहीं।
विज्ञापन
गलत रिपोर्ट और छेड़छाड़ का खतरा
नियमों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच केवल रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं, लेकिन यूरोलॉजी विभाग में आयुष डॉक्टर जांच कर रहे हैं। महिला मरीज का आरोप है कि इसी आयुष डॉक्टर ने जांच के बहाने उसके साथ छेड़छाड़ की। घटना के एक सप्ताह बाद भी आरोपी पर कोई कार्रवाई न होना केजीएमयू प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर
केजीएमयू में विशाखा समिति, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद न मरीज सुरक्षित हैं और न ही महिला स्टाफ। आयुष डॉक्टरों द्वारा अवैध रूप से की जा रही जांचें न केवल चिकित्सकीय रूप से जोखिम भरी हैं, बल्कि मरीजों की गरिमा के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि विभाग से जानकारी मांगी गई है। समिति गठित कर जांच कराई जाएगी। आयुष डॉक्टर पर आरोप की पुष्टि होने पर कंपनी पर भी कार्रवाई होगी।
प्रमुख घटनाएं
11 फरवरी 2026 : पीडियाट्रिक विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर ने एडिशनल प्रोफेसर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को निलंबित किया।
13 फरवरी 2026 : असिस्टेंट प्रोफेसर पर महिला डॉक्टर से छेड़छाड़ और मोबाइल पर आपत्तिजनक मेसेज भेजने के आरोप लगे। आरोपी को निलंबित किया गया।
2 जनवरी 2026 : नर्सिंग छात्रा ने एमबीबीएस इंटर्न पर यौन शोषण, शादी का झांसा और धमकी देने के आरोप लगाए। एफआईआर दर्ज कराई गई। छात्र की इंटर्नशिप रद्द की गई।
19 दिसंबर 2025 : पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर पर यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के प्रयास के आरोप लगे। आरोपी गिरफ्तार, दाखिला रद्द।
8 नवंबर 2025 : सीनियर प्रोफेसर ने जूनियर फैकल्टी पर यौन उत्पीड़न व अभद्रता का आरोप लगाया।
17 जनवरी 2025 : मानसिक स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी पर मानसिक रूप से बीमार युवती से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे। केजीएमयू प्रशासन ने संविदा कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था।
21 जून 2024 : एमबीबीएस छात्रा ने हॉस्टल कर्मचारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। एमआईआर की सिफारिश और संबंधित एजेंसी ब्लैकलिस्ट की गई थी।
26 जनवरी 2024 : नर्सिंग अधिकारी ने सहकर्मी पर यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। आरोपी का ट्रांसफर किया गया।