मस्जिद के सामने लक्ष्मणजी की मूर्ति लगाए जाने पर उलेमा ने जताई नाराजगी, कहा- भव्य स्थान पर लगाएं
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भगवान लक्ष्मण जैसी बड़ी शख्सियत की मूर्ति किसी दूसरे भव्य स्थान पर लगाई जानी चाहिए। यह कहना है टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना शाह फजले मन्नान रहमानी का। नगर निगम कार्यकारिणी के फैसले पर एतराज जताते हुए कहा कि यह नए विवाद को जन्म देकर विवाद खड़ा करने की कोशिश है। शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे को खत्म करने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा।
नगर निगम कार्यकारिणी ने टीले वाली मस्जिद के सामने वीरवर लक्ष्मण की मूर्ति लगाए जाने का फैसला किया। इसको लेकर उलमा ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि टीले वाली मस्जिद में अलविदा, ईद और बकरीद की नमाज में हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। नमाजियों की भीड़ सड़क तक लगती है। मस्जिद में जगह कम है।
मौलाना ने बताया कि 1993 में भी मस्जिद के सामने मूर्ति लगाने की बात उठाई गई थी। उस समय शासन को अवगत कराया गया था कि जिस जगह पर मूर्तियां लगी होती हैं वहां पर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती है। अब एक बार फिर से राजनीतिक फायदे के लिए लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने की बात शुरू कर शहर का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
दो धार्मिक स्थल के बीच 100 मीटर की दूरी जरूरी
मौलाना ने कहा, हुसैनाबाद का पूरा क्षेत्र संरक्षित है। ऐसे में किसी भी तरह के निर्माण के लिये एएसआई से अनुमति लेनी होती है। वहीं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का निर्णय है कि किसी भी धार्मिक स्थल से दूसरे धार्मिक स्थल की दूरी कम से कम 100 मीटर की होनी चाहिए।
जिला प्रशासन संज्ञान ले
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने भी टीले वाली मस्जिद के पास लक्ष्मणजी की मूर्ति लगाने का ऐतराज जताया। मौलाना ने कहा कि मूर्ति के बहाने नगर निगम नए तरह के विवाद को जन्म देने की कोशिश कर रहा है। मौलाना ने कहा जिला प्रशासन इसे संज्ञान में ले। मुसलमानों को लक्ष्मणजी की मूर्ति लगाने से कोई ऐतराज नही है। शहर में तमाम चौराहे खाली पड़े हैं, जहां पर मूर्ति की स्थापना की जा सकती है।