फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ukraine Crisis: Many people of Lucknow also trapped, took shelter in the bunker, 50 food divided in 300, appeal to the government - call soon

Ukraine Crisis : लखनऊ के भी कई लोग फंसे, बंकर में ली शरण, 50 का खाना 300 में बंटा, सरकार से अपील- जल्दी बुलाओ

Sat, 26 Feb 2022 01:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 26 Feb 2022 01:55 AM IST
सार

शहर के विभिन्न इलाकों से वड़ी संख्या में बच्चे वहां मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। इन छात्रों ने अपने परिवारीजनों से वहां के जैसे हालात बयां किए हैं, उससे उनकी आंखों की नींद उड़ी हुई है।

विज्ञापन
Ukraine Crisis: Many people of Lucknow also trapped, took shelter in the bunker, 50 food divided in 300, appeal to the government - call soon
यूक्रेन के खारकेव के भूमिगत मेट्रो स्टेशन में शरण लिए भारतीय छात्राएं गौरी, रितिका मथुस्वामी और लखनऊ की प्रियल मिश्रा... - फोटो : amar ujala

विस्तार

युक्रेन में फंसे लखनऊ के छात्रों की सुरक्षा को लेकर शहरियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। शहर के विभिन्न इलाकों से वड़ी संख्या में बच्चे वहां मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। इन छात्रों ने अपने परिवारीजनों से वहां के जैसे हालात बयां किए हैं, उससे उनकी आंखों की नींद उड़ी हुई है। कहीं बंकर में सैकड़ों की संख्या में भारतीय छात्रों को शिफ्ट कर दिया गया है तो कहीं किसी स्कूल में। कोई आधा पेट खाकर काम चला रहा है तो किसी को इससे भी कम भोजन नसीब है। तमाम युवा वीडियो संदेश भेजकर वहां से निकालने की गुहार लगा रहे हैं। इनके अभिभावक भी सुरक्षित घर वापसी के लिए सोशल मीडिया के जरिये सरकार पर दबाव बना रहे हैं। 

विज्ञापन


युक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। एल्डिको निवासी अनिल कुमार गुप्ता की बेटी गरिमा गुप्ता ने बताया कि वे लोग किसी तरह से गूगल सर्च की मदद से भारतीय दूतावास पहुंचे। लेकिन भीषण ठंड में भीगते हुए साढ़े छह घंटे इंतजार करने के बाद उन्हें रुकने के लिए जगह मिली। दूतावास की इस मदद के बावजूद खाना-पानी पर्याप्त नहीं है। इन्हें नहीं पता कि कब तक उन्हें वहां रुकना होगा...खाना कब तक मिल पाएगा। इनके सामने एक बड़ा संकट मोबाइल चार्जिंग को लेकर भी है। गरिमा भी इसे बाद कुछ और नहीं बता पाई क्योंकि उसके मोबाइल की बैटरी खत्म हो रही थी। सिर्फ गरिमा ही नहीं  जानकीपुरम निवासी जेएस चौहान की बेटी ऋति सिंह भी इस वक्त अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर दोस्तों के साथ सरण लिए हुए है। वहां तापमान माइनस दो डिग्री है और लगातार हो रहे धमाके डरा रहे हैं। खाने-पीने के लिए भी वही है, जो साथ में बैग में लाए हैं। 
विज्ञापन


रहने के लिए सुरक्षित स्थान और खाने का संकट किस तरह बढ़ गया है, इसका अंदाजा फूलबाग निवासी राम कुमार सिंह की बेटी मधु के हालात से भी लगाया जा सकता है। मधु और उसके साथी  शुक्रवार सुबह छह बजे दूतावास पहुंच गए थे पर बहुत मिन्नतों के बाद बगल के स्कूल में रहने को ठिकाना 10 बजे मिल सका। इस स्कूल में तीन-चार सौ लोग हैं, मगर खाना महज 50 लोगों के लिए मिल पाया। जिसे सबने मिल-बांट कर खाया।लखनऊ के ही छात्र शशांक मिश्रा बताते हैं कि तड़के सायरन बजते ही सभी छात्र-छात्राओं को बंकर में भेज दिया गया था। अनहोनी न होने पर वे लोग निकले लेकिन दोपहर करीब दो बजे फिर सायरन बजने पर बंकर ही ठिकाना बना। शशांक भाग्यशाली है कि जिन फ्लैटों में छात्र-छात्राएं रह रहे हैं, उसके नीचे ही बंकर बना हुआ है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मुश्किल से मिला आश्रय
यूक्रेन में फंसी लखनऊ के फूलबाग निवासी राम कुमार सिंह की बेटी मधु कहती हैं कि शुक्रवार सुबह छह बजे हम लोग दूतावास पहुंचे थे। दस बजे तक बाहर ही रहे। बहुत मिन्नतों के बाद हमें बगल के स्कूल में आश्रय दिलाया गया। यहां 300-400 के करीब लोग हैं, मगर खाना महज 50 लोगों के लिए था, जिसे मिलबांट कर खाया। लगातार धमाकों की आवाज डरा रही है, हमें जल्द से जल्द यहां से निकाला जाए।

ठंड और ऊपर से बारिश, मोबाइल की बैटरी और खाना भी खत्म
एल्डिको निवासी अनिल कुमार गुप्ता की बेटी गरिमा गुप्ता ने बताया कि वे लोग किसी तरह से गूगल सर्च की मदद से भारतीय दूतावास पहुंचे। ठंड में भीगते हुए साढ़े छह घंटे इंतजार के बाद शेल्टर मिला। दूतावास हमारी मदद कर रहा है, लेकिन खाना-पानी पर्याप्त नहीं है। इसे लेकर हम डरे हैं कि कुछ और दिन रुकना पड़ा तो कैसे चलेगा। कोई मेट्रो के नीचे, कोई बंकर में, जहां जिसे जैसी जगह मिली, वक्त गुजार रहा है। अब मेरा मोबाइल भी बंद हो रहा है, किसी से बता नहीं होगी।

माइनस दो डिग्री पारा, अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर आश्रय
जानकीपुरम निवासी जेएस चौहान की बेटी ऋति सिंह भी इस वक्त अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर दोस्तों के साथ हैं। ऋति कहती हैं कि माइनस दो डिग्री तापमान, तेज धमाके डरा रहे हैं। हम सबके पास खाने को वही है, जो हमारे बैग में है। हम जल्द से जल्द अपने वतन लौटना चाहते हैं।

मेडिकल छात्रों को बंकर में किया गया शिफ्ट
छात्र शशांक मिश्रा ने बताया कि तड़के अलार्म बजते ही सभी छात्र-छात्राओं को बंकर में भेज दिया गया था। कोई अनहोनी न होने पर उन्हें बाहर निकाला गया। दोपहर करीब दो बजे एक बार फिर से अलार्म बजने पर दोबारा सभी को बंकर में भेजा गया। शशांक ने बताया जिन फ्लैट में सभी छात्र-छात्राएं रह रहे हैं, उसी के नीचे बंकर बना हुआ है। छात्रा ऋषिका घोष की मां रुपाली घोष ने बताया वहां अभी हालात सामान्य नहीं हैं। छात्रों के सामने खाने का संकट है। 

मेरे बेटे को बुलवा दीजिए...
गोसाईंगंज निवासी संगीता मिश्रा ने ट्वीट करके मदद मांगी है। उनका बेटा सक्षम मिश्रा भी वहां फंसा हुआ है। उनका कहना है कि वो इसलिए कुछ नहीं कह रहा क्योंकि उसे लगता है कि मम्मी परेशान होंगी, पर मैं चाहकर भी धैर्य नहीं रख पा रही हूं, मैं चाहती हूं कि सभी बच्चे जल्द से जल्द सकुशल लौटें।

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दें
जेएस चौहान कहते हैं कि हर माता-पिता की तरह हम भी परेशान हैं। हम तो बहुत पहले ही बुला लेना चाहते थे, पर हालात ही नहीं बन पाए, अब चीजें और मुश्किल हो गई हैं। बस सरकार से यही आग्रह है कि रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिए जाएं।

आप लोग कुछ कीजिए
रामकुमार सिंह कहते हैं कि अब आप मीडिया वाले ही कुछ कीजिए, ताकि प्रयास तेज हो सकें और बेटी को यहां बुलवाया जा सके। 

मुखर नहीं हो पा रहे कई डॉक्टर
यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे भारतीयों विद्यार्थियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। मदद के लिए लोग भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। मदद की गुहार करने वालों में लोहिया संस्थान और केजीएमयू के कुछ डॉक्टर भी हैं। हालांकि अभी भी इस मुद्दे पर मुखर होकर सामने नहीं आ रहे हैं। भारत के मुकाबले यूक्रेन में डॉक्टर की पढ़ाई के लिए दाखिला अपेक्षाकृत आसान है। ऐसे में यहां मेडिकल एग्जाम न पास करने पर कई डॉक्टरों ने अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेजा हुआ है। मगर वे इस बारे में खुलकर बोलने को तैयार नहीं हो रहे। छात्रा ऋषिका घोष की मां रुपाली घोष ने बताया वहां अभी हालात सामान्य नहीं हैं। छात्रों के सामने खाने का संकट है। 
 
एडवाइजरी में देरी की वजह से फंसे छात्र
आरडीएसओ स्थित विक्रम नगर निवासी एपी श्रीवास्तव के बेटी अमीषा श्रीवास्तव यूक्रेन के खारकिव शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे देश यूक्रेन के हालात को लेकर पहले ये ही अलर्ट थे। उन्होंने एडवाइजरी जारी कर अपने देश के बच्चों को वहां से निकाल लिया। वहीं भारत सरकार ने एडवाइरी काफी देर से जारी की है। इससे बच्चों को निकलने का मौका ही नहीं मिला। अब कहा जा रहा है कि बच्चे वाहन का इंजताम कर एयरपोर्ट तक पहुंचें। जबकि खारकिव शहर के सबसे नजदीक का एयरपोर्ट भी 1200 किमी दूर है। ऐसे में सरकार की मदद के बगैर बच्चे कैसे निकल सकते हैं। उन्होंने सरकार से सभी छात्र-छात्राओं की मदद करने की मांग की। 
 
एयरपोर्ट सील, कैसे निकलें बच्चे
ठाकुरगंज के तहसीनगंज निवासी रश्मि श्रीवास्तव की बेटी तरीचिका श्रीवास्तव यूक्रेन के खारकिव शहर में एमबीबीएस की शिक्षा हासिल कर रहीं हैं। बेटी से लगभग रोज बात हो रही है, लेकिन शुक्रवार सुबह से बात नहीं हो पाई, जिससे चिंता बढ़ गई है। एयरपोर्ट सील कर दिए हैं। बच्ची किन हालात में रह रही है बता पाना मुश्किल है। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वहां फंसे बच्चों को जल्द से जल्द निकलवाएं।

मां मांग रही सलामती की दुआ
मोहनलालगंज के खुजौली गांव के रिटायर्ड अध्यापक मोहम्मद हुसैन ने बताया कि बेटे ताहिर को भारत आने के लिए टिकट मिल गया था। इस बीच युद्ध शुरू हो गया। ताहिर ने वहां से बताया है कि वह पंद्रह भारतीय छात्रों के साथ बंकर में रह रहा है। एयरपोर्ट व सड़कें तबाह होने के कारण दूतावास के कर्मचारी छात्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। खाने-पीने के सामान की किल्लत है। पिता ने बेटे को लौटा लाने की गुहार लगाई है। ताहिर की मां असगरी बेगम बेटे की सलामती की दुआ कर रही हैं।


परिवार से मिली अरीबा हैं खुश, दोस्तों के लिए चिंतित 
इंदिरानगर निवासी जमील खान की बेटी अरीबा खान यूक्रेन के इवानों फ्रांकिसिस्क शहर के इवानों फ्रांकिविस्क मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा की हैं। जंग हालात शुरू होते ही करीब एक महीना पहले उन्होंने यूक्रेन छोड़ दिया था। अब वो अपने परिजनों के साथ होने पर खुदा का शुक्र अदा कर रहीं हैं। हालांकि वो अपने दोस्तों और यूक्रेन में फंसे अन्य भारतीयों के लिये चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर से महज तीन किमी दूर सबसे महफूज समझे जाने वाले एयरपोर्ट को रूस ने उड़ा दिया है। उन्होंने बताया कि तमाम बच्चे फ्लाइट का टिकट मंहगा होने की वजह से यूक्रेन नही छोड़ सके हैं। इस समय यूक्रेन का किराया 59 हजार रुपये है। उन्होंने सरकार से किराया कम करने की मांग की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed