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JEE की तर्ज पर यूपी में होगा 'नकलमुक्त' SEE
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Mon, 07 Oct 2013 12:33 PM IST
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प्रदेश में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) अब दो चरणों में होगी। सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में दाखिले के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी।
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इसे आईआईटी में दाखिले के लिए होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मेंस व एडवांस की तर्ज पर करवाया जाएगा। ऐसे में अप्रैल 2014 में दाखिले के लिए स्टूडेंट्स को एसईई मेंस व एसईई एडवांस देना होगा।
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एसईई मेंस पास करने वाले ऊंची मेरिट के स्टूडेंट्स प्रदेश में सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली एसईई एडवांस में बैठेंगे। एसईई में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही कमेटी के अध्यक्ष प्रो. दुर्ग सिंह चौहान एसईई में सुधार के लिए सबसे बड़ा सुझाव यही दे रहे हैं।
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प्रो. चौहान ने बताया कि एसईई में रिफॉर्म की बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करने में वे जुटे हुए हैं और उसे जल्द गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) को सौंप देंगे। जीबीटीयू इस कमेटी द्वारा एसईई के लिए सुझाए गए सुधारों को लागू करेगी।
प्रो. चौहान कहते हैं कि एसईई में सॉल्वर इसलिए ही बैठते हैं कि वे अभ्यर्थी को एक झटके में अच्छे अंक दिलाकर सरकारी कॉलेज में प्रवेश दिलवा देते हैं।
परीक्षा पैटर्न में इस बदलाव के बाद वे फर्जी अभ्यर्थी बनकर दो-दो बार परीक्षा देने की जहमत नहीं उठाएंगे। प्रो. चौहान कहते हैं कि एसईई एडवांस के तहत जिन सरकारी कॉलेजों में दाखिला होना है, उनकी सीटों के तीन गुने अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठाए जाएं।
यानी एसईई मेंस में ऊपर की मेरिट से तीन गुने अभ्यर्थी छांटकर एसईई एडवांस में बैठा दिए जाएं। अपनी जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे अहम बिंदु उन्होंने अभ्यर्थियों के सत्यापन का रखा है।
इसमें प्रवेश पत्र स्मार्ट कार्ड की तरह बनवाए जाएं और उसमें स्टूडेंट का बड़ा फोटो लगाया जाए। इसके बाद उसकी बायोमीट्रिक जांच की जाए। स्मार्ट कार्ड सरीखे एडमिट कार्ड की जांच के लिए एक बार मशीनें खरीद ली जाएं, जो हर साल काम आएंगी।
इसके लिए अलग सेल बने और उसमें शामिल एक्सपर्ट यह तय करें कि जो अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा दे रहा है, वही दाखिले के लिए आ रहा है या नहीं। रिमोट एरिया के कॉलेजों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएं तो यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि वहां सरकारी कॉलेजों के शिक्षक ही ड्यूटी करें।
इसके लिए दूसरे सरकारी इंस्टीट्यूशंस से भी टीचर्स की मदद ली जा सकती है। सरकारी कर्मचारी होने के कारण वे अधिक विश्वासपात्र होंगे।
एसईई के दिन सीनियर्स की उपस्थिति हो सुनिश्चित
प्रो. चौहान कहते हैं कि कमेटी की ओर से यह सुझाव भी दिया जाएगा कि एसईई के दिन सभी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सेकंड ईयर से लेकर फोर्थ ईयर तक के सभी स्टूडेंट्स की उपस्थिति दर्ज करवाई जाए।
उन्हें पहले ही बता दिया जाए कि इस दिन कॉलेज आना जरूरी है और हॉस्टलों में विशेष निगरानी रहे। एसईई 2013 में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के जो स्टूडेंट सॉल्वर बनकर बैठे थे, वे हॉस्टल में रहते थे और सभी पेशेवर थे।
ऐसे में जब उन्हें परीक्षा के दिन हॉस्टल व कैंपस में रोका जाएगा तो वे किसी भी कीमत पर सॉल्वर बनकर परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
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