सचिवालय का पूर्व संविदाकर्मी सीएम का ओएसडी बन करता था ठगी, गिरफ्तार व बरामद हुआ ये सब सामान
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दोनों ठग अधिकारी को कॉल कर बोलते थे कि ‘मैं मुख्यमंत्री का ओएसडी बोल रहा हूं। एक आदमी भेज रहा हूं, जिसका काम करवा दीजिए। कोई दिक्कत हो तो बता दें, ताकि आपकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी जाए’। इसी नंबर पर संचालित व्हॉट्सएप से मेसेज भी भेजते थे। इन व्हॉट्सएप की डीपी पर प्रदेश सरकार का राजकीय चिह्न लगा रखा था। एसएसपी के मुताबिक , जालसाज नौकरी, ठेका, आवास दिलाने का दावा करते थे। यहां तक कि ट्रांसफर, पोस्टिंग और ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर भी वसूली करते थे। जालसाजों ने फर्जी आदेश पत्र भी बनवा रखे थे।
सीओ क्राइम दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, जालसाजों के पास से दो डायरी मिली है। एक डायरी में अधिकारियों के सीयूजी और निजी मोबाइल नंबर, पद और वर्तमान तैनाती स्थल लिखा है। वहीं, दूसरी डायरी में उनके नाम व मोबाइल नंबर दर्ज है, जिनके काम का ठेका लेते थे। नाम के आगे लिखा है कि कौन सा काम कराना है, कितनी रकम लेनी है, किस अधिकारी को कॉल करनी है।
राजधानी से चलाते थे गिरोह
प्रभारी निरीक्षक गौतम पल्ली सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक, जालसाजों का नेटवर्क पूरे प्रदेश में है। आलोक गोमतीनगर के विकल्प खंड और दुर्गेश विजयेंद्र खंड में रहता था। गिरोह के लोग पीड़ित को गोमतीनगर व हजरतगंज इलाके में बुलाकर लेनदेन करते थे। बातचीत के दौरान कई बार मोबाइल पर गिरोह के सदस्य को अधिकारी बता कॉल कर धमकाते थे।