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स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना में घोटाला: ईओडब्ल्यू की एफआईआर में दो पूर्व सीडीओ भी नामजद

Thu, 31 Jan 2019 12:15 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 31 Jan 2019 12:15 AM IST
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Two former CDOs are also nominated in EOW FIR
प्रतीकात्मक तस्वीर
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने झांसी में स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगारा योजना में हुए घपले के मामले में दर्ज एफआईआर में झांसी के दो पूर्व मुख्य विकास अधिकारी संजय कृष्ण और जेपी गुप्ता को भ्रष्टाचार का आरोपी बनाया गया है।
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यह एफआईआर पिछले दिनों ईओडब्ल्यू ने कानपुर सेक्टर थाने में दर्ज की है। लगभग 20 लाख रुपये के इस घोटाले में जो आरोपी बनाए गए हैं उसमें पूर्व सीडीओ, एडीओ और वीडीओ समेत कई सरकारी कर्मी शामिल हैं। 
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11 अप्रैल 2007 को इस बारे में शासन से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी। इसकी अनुमति पिछले वर्ष शासन ने दी थी। दर असल शासन के ही निर्देश पर स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना में हुए घोटाले की जांच कराई गई थी। 
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जांच के दौरान न सिर्फ इस योजना में बरती गई अनियमितता सामने आई थी बल्कि ग्राम विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी तक की मिली भगत का भी खुलासा हुआ था। 

आरोप है कि शासन के एक फर्जी आदेश के सहारे इस योजना में किताबों के क्रय की प्रक्रिया को टेंडर कोटेशन से मुक्त कर लाखों की हेराफेरी की गई। आरोप है कि इन लोगों द्वारा लखनऊ की संस्था आईडियल वेलफेयर सोसाइटी को इन अधिकारियों व कर्मियों ने अनुचित लाभ पहुंचाया।

जिन लोगों को ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में दोषी पाया उसमें झांसी के दो तत्कालीन सीडीओ संजय कृष्ण और जेपी गुप्ता के अलावा परियोजना निदेशक अमर सिंह, परियोजना अर्थशास्त्री महेश चंद्र साहू, सहायक ग्राम्य विकास अभिकरण राज कुमार खरे, आंकिक ग्राम्य विकास अभिकरण राजेश कुमार शर्मा, ग्राम्य विकास अभिकरण लिपिक धनीराम, यूपी एसएस के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अनिल कुमार जायसवाल को आरोपी बनाया गया है। 

इसके अलावा आईडियल वेलफेयर सोसाइटी के सजल बनर्जी, अरुण कुमार राय, मधु राय, अभय सिंह, तत्कालीन वीडीओ गजेंद्र प्रताप सिंह, अखिलेश कुमार वैश्य, तत्कालीन एडीओ मनुप्यारे, ब्लाक स्तरीय कर्मचारी कैलाश बहादुर और राजकुमार कोरी को जालसाजी, हेराफेरी और भ्रष्टाचार का आरोपी बनाया है।
 
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