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Lucknow News: अंतरराष्ट्रीय काॅल धोखाधड़ी में बीएसएनएल के दो पूर्व इंजीनियरों को दो वर्ष की कैद
Mon, 01 Dec 2025 02:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 01 Dec 2025 02:07 AM IST
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लखनऊ। अनधिकृत ढंग से अंतरराष्ट्रीय कॉल कराकर बीएसएनएल को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के मामले में दो पूर्व इजीनियरों को कोर्ट ने दो-दो वर्ष की कैद और 10-10 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। दोषियों में गोरखपुर के बांसगांव स्थित टेलीफोन एक्सचेंज के तत्कालीन एसडीई हरिराम शुक्ला और तत्कालीन एसडीई गुलाब चंद चौरसिया का नाम शामिल है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रजनीश मोहन वर्मा ने मामले में आरोपी रहे तत्कालीन जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर सिया राम अग्रहरि को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
कोर्ट ने विवेचना के दौरान की गई लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा की विवेचक ने विवेचना और कोर्ट में झूठे तथ्य दिए। विवेचक संतुष्ट था कि उसका झूठ पकड़ा नहीं जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में शपथ लेकर झूठा बयान देना अपराध है और सीबीआई जैसी संस्था में कार्यरत किसी व्यक्ति से ऐसे अपराध की कल्पना नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जैसी संस्था की शुचिता को धूमिल करने और कोर्ट में शपथ लेकर झूठा बयान देने वाले विवेचक सुरेंद्र राय के खिलाफ उचित विधिक कार्यवाही के लिए इस निर्णय की एक प्रति सीबीआई के निदेशक को भेजी जाए।
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कोर्ट ने कहा की एफआईआर में आरोप लगाया गया की बीएसएनएल अधिकारियों ने मिलीभगत करके विशेष कोड बनाए और छह पीसीओ धारकों और 18 व्यक्तियों को बिना प्राधिकार के एसटीडी और आईएसडी सुविधा दी गई, लेकिन विवेचक ने चार्जशीट में इन सभी को न तो आरोपी बनाया और न ही इन लोगों के बयान ही दर्ज किए।
रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं पीसीओ धारकों और व्यक्तियों ने अनधिकृत रूप से सऊदी अरब और श्रीलंका में आईएसडी कॉल का प्रयोग किया और मुनाफा कमाया। इनकी वजह से बीएसएनएल को एक करोड़ तेरह लाख सात हजार तीन सौ दस रुपये का नुकसान हुआ।
कोर्ट ने कहा की विवेचक ने फोन के डेड होने की कोई विवेचना नहीं की और इतने बड़े अपराध में शामिल उन 24 पीसीओ धारकों और व्यक्तियों को क्लीन चिट दे दिया, जबकि वे सभी एफआईआर में नामजद थे।
यह था मामला
सीबीआई ने 18 सितंबर 2008 को मामला दर्ज किया था। इसमें बताया गया की सीबीआई को जानकारी मिल रही थी कि गोरखपुर के ग्रुप एक्सचेंज के तत्कालीन एसडीई हरिराम शुक्ला, गुलाब चंद चौरसिया, जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर सिया राम अग्रहरि ने छह पीसीओ धारकों और 18 व्यक्तिगत टेलीफोन उपभोक्ताओं के साथ मिलकर सितंबर 2003 से सितंबर 2004 के बीच अनधिकृत तरीके से इन 24 लोकल टेलीफोन नंबरों पर आईएसडी कॉल की सुविधा उपलब्ध कराई है। सीबीआई ने विवेचना के बाद हरिराम, गुलाब चंद और सिया राम के खिलाफ एक मई 2010 को चार्जशीट दायर की थी।
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सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रजनीश मोहन वर्मा ने मामले में आरोपी रहे तत्कालीन जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर सिया राम अग्रहरि को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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कोर्ट ने विवेचना के दौरान की गई लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा की विवेचक ने विवेचना और कोर्ट में झूठे तथ्य दिए। विवेचक संतुष्ट था कि उसका झूठ पकड़ा नहीं जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में शपथ लेकर झूठा बयान देना अपराध है और सीबीआई जैसी संस्था में कार्यरत किसी व्यक्ति से ऐसे अपराध की कल्पना नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जैसी संस्था की शुचिता को धूमिल करने और कोर्ट में शपथ लेकर झूठा बयान देने वाले विवेचक सुरेंद्र राय के खिलाफ उचित विधिक कार्यवाही के लिए इस निर्णय की एक प्रति सीबीआई के निदेशक को भेजी जाए।
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कोर्ट ने कहा की एफआईआर में आरोप लगाया गया की बीएसएनएल अधिकारियों ने मिलीभगत करके विशेष कोड बनाए और छह पीसीओ धारकों और 18 व्यक्तियों को बिना प्राधिकार के एसटीडी और आईएसडी सुविधा दी गई, लेकिन विवेचक ने चार्जशीट में इन सभी को न तो आरोपी बनाया और न ही इन लोगों के बयान ही दर्ज किए।
रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं पीसीओ धारकों और व्यक्तियों ने अनधिकृत रूप से सऊदी अरब और श्रीलंका में आईएसडी कॉल का प्रयोग किया और मुनाफा कमाया। इनकी वजह से बीएसएनएल को एक करोड़ तेरह लाख सात हजार तीन सौ दस रुपये का नुकसान हुआ।
कोर्ट ने कहा की विवेचक ने फोन के डेड होने की कोई विवेचना नहीं की और इतने बड़े अपराध में शामिल उन 24 पीसीओ धारकों और व्यक्तियों को क्लीन चिट दे दिया, जबकि वे सभी एफआईआर में नामजद थे।
यह था मामला
सीबीआई ने 18 सितंबर 2008 को मामला दर्ज किया था। इसमें बताया गया की सीबीआई को जानकारी मिल रही थी कि गोरखपुर के ग्रुप एक्सचेंज के तत्कालीन एसडीई हरिराम शुक्ला, गुलाब चंद चौरसिया, जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर सिया राम अग्रहरि ने छह पीसीओ धारकों और 18 व्यक्तिगत टेलीफोन उपभोक्ताओं के साथ मिलकर सितंबर 2003 से सितंबर 2004 के बीच अनधिकृत तरीके से इन 24 लोकल टेलीफोन नंबरों पर आईएसडी कॉल की सुविधा उपलब्ध कराई है। सीबीआई ने विवेचना के बाद हरिराम, गुलाब चंद और सिया राम के खिलाफ एक मई 2010 को चार्जशीट दायर की थी।