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Lucknow News: एक साथ उठीं दो अर्थियां, हर आंख हुई नम
Sat, 20 Sep 2025 02:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 20 Sep 2025 02:30 AM IST
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अजय, अंकुश व गोपी की फाइल फोटो।
लखनऊ। बहराइच के कैसरगंज इलाके में बुधवार रात सरयू नदी में डूबे राजाजीपुरम के सी ब्लॉक हैदर कैनाल निवासी अंकुश निषाद (19) व चचेरे भाई गोपी निषाद (18) का शव शुक्रवार को घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि एक दिन पहले हंसी-खुशी घर से निकले दोनों युवक जिंदा वापस नहीं लौटेंगे।
घटना के बाद से दोनों घरों में मातम पसरा है। घर पर परिजनों और स्थानीय लोगों की भीड़ रही। अंकुश व गोपी बुधवार को बहराइच जाने के लिए निकले थे। उन्हें ठाकुरपुरवा निवासी फुफेरे भाई अजय की पत्नी आरती के तेरहवीं संस्कार में शामिल होना था। रात आठ बजे घर में बिना बताए अजय, अंकुश और गोपी गांव के पास सरयू नदी में नाव की सैर करने निकले थे। नाव पलटने से तीनों की मौत हो गई थी।
शुक्रवार दोपहर दो बजे अंतिम संस्कार के लिए एक साथ दोनों की अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। दोनों शवों को राजाजीपुरम के काला पहाड़ स्थित श्मशान घाट में दफना दिया गया। वहीं अजय कश्यप का उनके गांव ठाकुरपुरवा में बृहस्पतिवार देर रात ही दाह संस्कार कर दिया गया।
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छह माह की उम्र में अंकुश को लिया था गोद
छह माह की उम्र में ही अंकुश को उसकी मौसी सुनीता ने अपनी बड़ी बहन कोमल से गोद लिया था। सुनीता की सात बेटियां हैं। सातों बहने अंकुश को बहुत मानती थीं। अंकुश घर में सबका दुलारा था। वहीं, गोपी का शव देखते ही मां राधा बेसुध हो गईं। वह बेटे के शव से लिपट कर रोने लगीं। बड़ी मुश्किल से परिजनों ने उन्हें संभाला। गोपी के भाई गोलू, गोपाल व बहन काजल का भी रो-रो कर बुरा हाल था।
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घटना के बाद से दोनों घरों में मातम पसरा है। घर पर परिजनों और स्थानीय लोगों की भीड़ रही। अंकुश व गोपी बुधवार को बहराइच जाने के लिए निकले थे। उन्हें ठाकुरपुरवा निवासी फुफेरे भाई अजय की पत्नी आरती के तेरहवीं संस्कार में शामिल होना था। रात आठ बजे घर में बिना बताए अजय, अंकुश और गोपी गांव के पास सरयू नदी में नाव की सैर करने निकले थे। नाव पलटने से तीनों की मौत हो गई थी।
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शुक्रवार दोपहर दो बजे अंतिम संस्कार के लिए एक साथ दोनों की अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। दोनों शवों को राजाजीपुरम के काला पहाड़ स्थित श्मशान घाट में दफना दिया गया। वहीं अजय कश्यप का उनके गांव ठाकुरपुरवा में बृहस्पतिवार देर रात ही दाह संस्कार कर दिया गया।
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छह माह की उम्र में अंकुश को लिया था गोद
छह माह की उम्र में ही अंकुश को उसकी मौसी सुनीता ने अपनी बड़ी बहन कोमल से गोद लिया था। सुनीता की सात बेटियां हैं। सातों बहने अंकुश को बहुत मानती थीं। अंकुश घर में सबका दुलारा था। वहीं, गोपी का शव देखते ही मां राधा बेसुध हो गईं। वह बेटे के शव से लिपट कर रोने लगीं। बड़ी मुश्किल से परिजनों ने उन्हें संभाला। गोपी के भाई गोलू, गोपाल व बहन काजल का भी रो-रो कर बुरा हाल था।

अजय, अंकुश व गोपी की फाइल फोटो।

अजय, अंकुश व गोपी की फाइल फोटो।