स्कूली वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो स्कूल प्रबंधन होगा जिम्मेदार
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स्कूल वाहन अगर दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो इसका जिमेदार स्कूल प्रबंधन होगा। परिवहन विभाग का मानना है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से सही समय पर अपने वाहनों पर ध्यान न दिए जाने से दुर्घटनाएं होती हैं।
अब भविष्य में अगर दुर्घटनाएं हुईं तो स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस सिलसिले में परिवहन विभाग ने बुधवार को स्कूली वाहनों के लिए गाइडलाइन जारी किया है।
गाइडलाइन में कहा गया कि स्कूल व कॉलेजों में संचालित बसों, मिनी बसों, मारुति वैन, टेंपो, टैक्सी की सुनियोजित ढंग से जांच की जाए। इससे अवैध व खराब दशा के वाहनों के संचालन की संभावना कम हो सके। स्कूल प्रबंधन का यह दायित्व होगा कि सही समय पर वे अपने स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच कराएं।
उप परिवहन आयुक्त अरविंद कुमार पांडेय ने सरकुलर में कहा है स्कूल में लगे वाहनों के लिए जो शर्तें तय हैं उन्हें उन्हीं के अनुरूप संचालन करना होगा। इनमें वाहन का शैक्षणिक संस्था के नाम से पंजीकृत होना आवश्यक है। निजी ऑपरेटर भी अपने वाहन को स्कूल के मानक के अनुरूप पंजीकरण कराकर स्कूल बस के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
परिवहन विभाग की गाइडलाइन
स्कूल में बसों के संचालन के लिए प्राइवेट बसों को ठेका गाड़ी परमिट लेना आवश्यक होगा। स्कूल बस के आगे व पीछे मोटे अक्षरों में स्कूल बस लिखा होना अनिवार्य होगा।
कोई भी स्कूल बस किराए की फुटकर सवारी नहीं ढोएगी।
स्कूल बस पर स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए। स्कूली बसों की अधिकतम आयु 15 वर्ष होगी। बसों में बच्चों की सूची, नाम व पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप व रूट चार्ट उपलब्ध होना चाहिए।
स्कूली वाहन में चालक के अलावा अनुभवी पुरुष या महिला सहायक तैनात होंगे जो बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखेंगे। स्कूल बस के चालक व सहायक को ड्यूटी के समय ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा।