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लौटी रौनक, जू में फिर से दौड़ी बाल रेल
आशुतोष/लखनऊ
Updated Sun, 06 Oct 2013 09:34 AM IST
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चिड़ियाघर के यार्ड में 10 सितंबर से खड़ी बच्चों की पसंदीदा बाल रेल शनिवार को एक बार फिर दौड़ने लगी। सुबह के सुहाने मौसम में घूमने पहुंचे शहरियों की रौनक से बाल रेल का चंद्रपुरी स्टेशन गुलजार रहा।
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बच्चों संग उनके अभिभावकों ने भी बाल रेल की सवारी का लुत्फ उठाया। काले हिरनों की मौत के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर हिरनों के बाड़े के चारों ओर हरे पर्दे लगा दिए गए थे।
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जबकि डेढ़ सौ मीटर इलाके में बैरीकेटिंग किए जाने से 10 सितंबर से ही बाल रेल स्टेशन के पास ही यार्ड में खड़ी थी। शनिवार सुबह ट्रैक की सफाई, मरम्मत करने के बाद बाल रेल शुरू की, जिसने दिन में कई चक्कर लगाए।
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उधर, शुक्रवार से शुरू हुआ बैट्री चालित वाहन पूरी तरह से चार्ज नहीं होने से शनिवार दोपहर को खड़ा हो गया। इससे जू आने वाले लोगों को काफी मायूसी हुई।
भालू की रोटी हो, बंदरों के लिए चने या जेसन का अंडा। वन्यजीवों के भोजन को तैयार करने की प्रक्रिया को अब हाइजेनिक बनाए जाने की तैयारी है।
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विगत दिनों हुई बैठक में ये प्रस्ताव भी रखा गया है कि वन्यजीवों के किचन में अब स्टाफ हाइजेनिक होकर खाना तैयार करेगा।
इसके लिए स्टाफ को ग्लब्स, सर्विंग ग्लब्स, शू कवर, हेड कवर से लैस किए जाने का प्लान है। साथ ही वन्यजीवों के कुछेक भोज्य पदार्थों को पकाए जाने वाले बर्तनों को लाल दवा के पानी में साफ किए जाने पर भी चर्चा हो चुकी है।
हालांकि इन सब पर चिकित्सकों की राय का अभी इंतजार है। साथ ही तैयारी की जा रही है कि बाड़ों में जाने वाला स्टाफ भी थ्री-टियर सेनीटाइज होकर ही प्रवेश करें।
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