अब अपने ही गढ़ में 'नेता जी' का भी इम्तिहान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीसरे चरण के मतदान में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के भाग्य का भी निर्णय होना है। इस बार के चुनावी समीकरण में नेता जी और उनके परिवार की राह मुश्किल नजर आ रही है। देखें क्या हैं समीकरण।
24 अप्रैल को जिन 12 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें खुद मुलायम, उनकी पुत्रवधू डिंपल यादव और उनके भतीजे अक्षय यादव चुनाव लड़ रहे हैं।
सपा के सामने इन तीनों को जिताने के साथ ही दूसरी सीटों पर बढ़त बनाने की चुनौती है। तीसरे चरण में बृज और मध्य यूपी के क्षेत्रों में मतदान होना है। यह इलाका सपा का गढ़ माना जाता है।
मुश्किल में मुलायम की प्रतिष्ठा
पिछले लोकसभा चुनाव में यहां सपा को सर्वाधिक चार, कांग्रेस को तीन, रालोद को दो और भाजपा एवं बसपा को एक-एक सीट मिली थी।
एक सीट पर सपा के समर्थन से कल्याण सिंह चुनाव जीते थे। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को इस क्षेत्र में शानदार कामयाबी मिली।
कुल 60 सीटों में सपा को 37, बसपा को 12, भाजपा को पांच, रालोद को चार, कांग्रेस और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। इस क्षेत्र की मैनपुरी सीट से खुद सपा मुखिया मुलायम सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।
हालांकि उनके सामने बड़ी चुनौती नहीं मानी जा रही, फिर भी उनका मुकाबला भाजपा के शत्रुघ्न सिंह चौहान और बसपा की संघमित्रा मौर्य से है।
यहां शिवपाल सिंह हैं मुखिया
आम आदमी पार्टी ने पीसीएस अधिकारी रहे बाबा हरदेव सिंह और पीस पार्टी ने अबू नसीम पठान को मैदान में उतारा है। यहां चुनाव की कमान शिवपाल सिंह यादव ने संभाल रखी है।
फर्रुखाबाद में मुलायम के करीबी रामेश्वर सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें सचिन सिंह यादव का टिकट काटकर मैदान में उतारा गया है। सचिन पार्टी से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
इसी वजह से उनके पिता नरेंद्र सिंह यादव को राज्यमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया है। पार्टी में हुई उठापटक के बाद इस सीट से भी मुलायम की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर जुड़ गई है।
हाथरस सीट पर सपा महासचिव रामजी लाल सुमन कड़े चुनावी मुकाबले में फंसे हुए हैं। उन्हें रालोद के निरंजन सिंह धनगर, भाजपा के राजेश कुमार दिवाकर और बसपा के मनोज कुमार सोनी से चुनौती मिल रही है।
यहां सपा के नये उम्मीदवार
इसी तरह फतेहपुर सीकरी सीट पर कैबिनेट मंत्री महेंद्र अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह को बसपा की सीमा उपाध्याय, भाजपा के चौधरी बाबूलाल और रालोद के अमर सिंह से जूझना पड़ रहा है।
एटा सीट पर पिछली बार सपा के समर्थन से कल्याण सिंह सांसद चुने गए थे। इस बार सपा ने यहां देवेंद्र सिंह यादव को मैदान में उतारा है।
उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह उर्फ राजू भैया तथा बसपा के नूर मोहम्मद खान से है।
कांग्रेस ने यह सीट समझौते में महान दल के लिए छोड़ दी है। इसके अलावा हरदोई, अकबरपुर, मथुरा और आगरा सुरक्षित सीटों पर भी सपा की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है।
डिंपल बहा रहीं पसीना
अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई जिस कन्नौज लोकसभा सीट पर वर्ष 2012 में उनकी पत्नी डिंपल यादव निर्विरोध चुनी गई थीं, वहां उन्हें अब भाजपा के सुब्रत पाठक और बसपा के निर्मल तिवारी से मुकाबिल होना पड़ रहा है।
कांग्रेस ने यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। डिंपल यहां चुनाव प्रचार में खूब पसीना बहा रही हैं।
अखिलेश यादव और शिवपाल यादव भी यहां कई चुनावी सभाओं को संबोधित कर चुके हैं।
घर में भी मुखिया को चुनौती
फीरोजाबाद से सपा महासचिव रामगोपाल यादव अपने बेटे अक्षय यादव को दिल्ली भेजकर उनकी राजनीतिक पारी शुरू कराना चाहते हैं।
अक्षय को भाजपा के प्रो. एसपी सिंह बघेल, बसपा के विश्वदीप सिंह और कांग्रेस केअनिल चतुर्वेदी का सामना करना पड़ रहा है। यहां चुनाव संचालन की कमान खुद रामगोपाल संभाले हुए हैं।
इटावा सपा मुखिया का गृह जनपद है। यहां सपा से सांसद प्रेमदास कठेरिया दुबारा मैदान में हैं। उन्हें भाजपा के अशोक कुमार दोहरे, बसपा के अजयपाल सिंह यादव और कांग्रेस की हंसमुखी कोरी से चुनौती मिल रही है।
शुक्रवार को यहां नरेंद्र मोदी ने मुलायम को ललकार कर माहौल को गरमा दिया है। इस सीट पर हार-जीत सपा मुखिया से ही जोड़कर देखी जाती है।