दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन के लिए दोपहर से रात तक तीन शुभ मुहूर्त, अपनाएं ये पूजन विधि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिवाली पर रविवार को महालक्ष्मी के पूजन को दोपहर से लेकर रात तक तीन शुभ मुहूर्त हैं। गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप के मुताबिक, ऐश्वर्य-लक्ष्मीकारक स्थिर वृष लग्न में शाम 6:25 से रात 8:22 बजे तक का समय गृहस्थों-व्यापारियों के लिए पूजन का सबसे शुभ समय रहेगा।
दीपावली पर दिनभर पूजन के मुहूर्त
लग्न--समय
कुंभ लग्न--दोपहर 1:54 से 3:25 बजे तक।
वृष लग्न--शाम 6:25 बजे से रात 8:22 बजे तक।
सिंह लग्न--रात 12:54 से 3:07 बजे तक। (महानिशा पूजन वालों के लिए)
सोएं नहीं, दरिद्रता भगाएं और मां लक्ष्मी को बुलाएं
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, दीपावली की रात पूजन के बाद गृहस्वामी और गृहस्वामिनी को जागरण करना चाहिए। रात को जब मां लक्ष्मी घर-घर विचरण करती हैं तो जिस घर, प्रतिष्ठान में उन्हें सफाई, दीपमाला, रोशनी दिखती हैं, वे वहीं निवास कर लेती हैं। ब्रह्ममुहूर्त में महिलाओं को घर से सूप बजाते हुए निकलना चाहिए, इससे दरिद्रता का नाश होता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि
- लक्ष्मी-गणेश की स्थापना पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख कर करें।
- लक्ष्मीजी की प्रतिमा को गणेशजी के दाहिने और वरुणदेव के प्रतीक कलश को मां लक्ष्मी के पास चावलों पर स्थापित करें।
- तेल और गौ घृत के दो दीपक जलाकर प्रतिमा-कलश के पास स्थापित करें।
- दोनों ही प्रतिमाओं का स्नान, आचमन करें। लाल रंग के नववस्त्रों, कमल पुष्प अर्पण करें।
- पंचगव्य (दुग्ध, दधि, मधु, गंगाजल और शर्करा) का भोग लगाएं।
- पूजन के दौरान ‘ऊं भूर्भव: स्व: महालक्ष्मयै नम:’ के उच्चारण के साथ मां लक्ष्मी को वस्तुएं अर्पित करें।
- आरती के बाद चूरा, खील, बताशे, लइया, गट्टे, सफेद मिष्ठान्न और फल (विशेषकर अनार) चढ़ाएं।
- व्यापारी पूजन के समय बही-खातों के साथ सिक्कों की थैली-तिजोरी की चाभियां रखकर पूजन करें।