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भुगतान न देने पर मिलों के नुमाइंदों को फटकार
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Updated Sat, 25 Jan 2014 08:51 AM IST
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गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा ने किसानों को पिछले साल का बकाया भुगतान अदा न करने पर निजी चीनी मिलों के नुमाइंदों के पेंच कसे।
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सख्त रुख अख्तियार करते हुए उन्होंने कहा कि किसान उनसे मांग क्या रहे हैं? क्या उन्हें पिछले साल आपूर्ति किए गए गन्ने के दाम के लिए इतना इंतजार करना पड़ेगा?
यही हाल रहा तो फरवरी-मार्च में पौधा गन्ने की बुवाई नहीं हो पाएगी और अगले साल चीनी मिलों के सामने गन्ना का संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने 28 जनवरी तक बकाया भुगतान न करने पर आरसी जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी। सुभाष चंद शर्मा शुक्रवार को निजी मिलों केे अध्यासियों के साथ गन्ना मूल्य भुगतान और ब्याज मुक्त ऋण दिए जाने की समीक्षा कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने नौ जनवरी को पिछले साल के बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज समेत भुगतान करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था।
निजी चीनी मिलों पर अभी भी 1715.56 करोड़ रुपया गन्ना मूल्य बकाया है। कई चीनी मिलों ने इस साल का भुगतान भी शुरू नहीं किया है। धीरे-धीरे किसानों के आंदोलन शुरू हो रहे हैं।
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लखीमपुर की गोला चीनी मिल का उदाहरण देते हुए कहा कि मिल तीन दिन से बंद पड़ी है। किसान अपना पैसा ही तो मांग रहे हैं। गन्ना आपूर्ति के 14 दिन बाद भुगतान करने की मिलों की जिम्मेदारी बनती है।
गन्ना आयुक्त ने कहा कि अभी तक किसानों के खेत खाली नहीं हो पाए हैं। 15 फरवरी से 15 मार्च का समय गन्ना बुवाई के लिए उपयुक्त होता है। इन हालात मेें कैसे बुवाई होगी?
फिर अगले सीजन में गन्ना कहां से आएगा? किसानों के सामने दूसरी फसलों के विकल्प हैं लेकिन चीनी मिल किसकी पेराई करेंगे? कई बार समझाने के बावजूद चीनी मिल गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने उनकी सहूलियत के लिए दो पार्ट में गन्ना भुगतान की मजूरी दी। चीनी मिलों की समस्याओं को उठाने के लिए खुद मुख्यमंत्री दिल्ली भी गए। मिल मालिकों की प्रदेश और केंद्र सरकार से वार्ता भी हुई।
किस ग्रुप ने क्या कहा
बजाज: शनिवार तक पिछले साल का 52 करोड़ रुपये देंगे। पुराना बकाया 374 करोड़ रुपये हैं जो 322 करोड़ रह जाएगा। 353 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त ऋण मिलना है। आवेदन कर दिया है।
बलरामपुर- पुराने भुगतान के 98 करोड़ और इस साल केगन्ना मूल्य के लिए 124 करोड़ रुपये दे रहे हैं। 28 जनवरी तक पिछले साल का भुगतान चुका देंगे।
मोदी ग्रुप- पिछले साल से बकाया भुगतान की कोशिश कर रहे हैं। 15 फरवरी तक बकाया अदा कर देंगे। चालू सीजन का 103 करोड़ रुपये देय है। दिल्ली का मोदी हाउस बेचने की अनुमति मांगी है।
बिड़ला- चारों चीनी मिलों पर पिछले साल का 101 करोड़ रुपया गन्ना मूल्य बकाया है। ब्याज मुक्त लोन के लिए अप्लाई कर दिया है। 106 करोड़ रुपये मिलने हैं। 28 तक पूरा भुगतान कर देंगे।
वेव ग्रुप-पिछले साल का 20.81 करोड़ रुपये बकाया हैं। ढाई करोड़ शनिवार को देंगे। 28 जनवरी तक पिछले साल का सौ फीसदी भुगतान कर देंगें।
मंसूरपुर- चालू सीजन का 54.6 करोड़ रुपये बकाया है। 10.78 करोड़ का भुगतान आज ही किया है। भुगतान प्रक्रिया तेज की जाएगी।
धामपुर- ब्याज मुक्त ऋण के लिए आवेदन कर दिया है। 109 करोड़ रुपये मिलेंगे। पिछले साल का केवल 24 करोड़ बकाया है।
द्वारिकेश-19 करोड़ रुपये आज दिया है। केवल 18 करोड़ बकाया रह गया है। बैंक से पैसा मिलते ही भुगतान कर देंगे।
त्रिवेणी: पिछले सीजन का 140 करोड़ रुपया अवशेष है। 21 करोड़ दे दिया है। 126 करोड़ रुपये ऋण मिलना है।
सात मिलों ने चालू सीजन में एक पैसा नहीं दिया
गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा ने चालू पेराई सत्र में किसानों को एक भी रुपया न भुगतान करने वाले सात चीनी मिलों की आरसी जारी करने की चेतावनी दी।
आयुक्त ने बताया कि मौजूदा पेराई सत्र में बिल्कुल भी भुगतान न करने वाले मिलों में मलकपुर और मोदीनगर (मोदी ग्रुप), मवाना, नंगलामल और तितावी मवाना (मवाना ग्रुप), हरदोई की बघौली (सहारा ग्रुप) मिलें हैं।
उन्होंने साफ किया कि बीआईएफआर में जाने का यह कतई मतलब नहीं कि चीनी मिल गन्ना खरीदें और भुगतान न दें। गन्ना खरीदने पर भुगतान न करने वाली मिलें सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
500 करोड़ रुपये है पिछले साल का ब्याज
अपर गन्ना आयुक्त एनपी सिंह ने बताया कि पेराई सत्र 2012-13 का बकाया गन्ना मूल्य समय से भुगतान न करने पर करीब 500 करोड़ रुपये ब्याज बनता है।
पिछले महीने आकलन कराया गया था तो ब्याज राशि 442 करोड़ रुपये थी। तब से इसमें और वृद्धि हो गई है। इस तरह बकाया राशि करीब 500 करोड़ रुपये है। हाईकोर्ट के आदेश पर चीनी मिलों को ब्याज समेत भुगतान करना है।
ब्याज मुक्त कर्ज के लिए आवेदन ही नहीं किया
गन्ना आयुक्त की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले ब्याज मुक्त कर्ज के लिए कई चीनी मिलों ने आवेदन ही नहीं किया है।
गन्ना आयुक्त ने आश्चर्य जताया कि चीनी मिलों ने क्यों तीन साल की एक्साइज ड्यूटी और सेस अदा करने के पेपर बैंकों में जमा नहीं कराए। लोन की गाइड लाइंस काफी पहले आ चुकी हैं।
केंद्र सरकार से बैंकों को पैसा भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ब्याज मुक्त ऋण के लिए अलग अकाउंट खोलना होगा। इस पैसे से प्राथमिकता के आधार पर पहले पिछले साल का बकाया चुकाना है।
सबसे बड़े बकायेदार
गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना मूल्य के सर्वाधिक बकायादारों में बजाज ग्रुप पर 374 करोड़, बलरामपुर पर 217 करोड़ और मवाना ग्रुप पर 195 करोड़ है।
इन मिलों ने शुक्रवार को कुछ भुगतान करने का वादा किया। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में वीएम सिंह की पीआईएल दाखिल होने के बाद 550 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है।
शुगर रिकवरी में पूर्वांचल अव्वल
सुभाष चंद शर्मा ने बताया कि प्रदेश की 119 चीनी मिलों ने 23 जनवरी तक 2650.91 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 234.59 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है।
प्रदेश का औसत चीनी परता 8.85 प्रतिशत है। पूर्वी यूपी में चीनी परता 9.01 प्रतिशत है जबकि मध्य व पश्चिमी यूपी में औसत चीनी परता क्रमश: 8.90 व 8.62 प्रतिशत है।