टाइगर टेंपल के फ्रीजर में 40 शावकों के शव की खबर पर ये बोले विजिटर
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टाइगर के साथ सेल्फी। उसे अपने दुलारे डॉगी की तरह गोद में घुमाना और यहां तक कि बॉटल से उसे दूध पिलाना। महज 700 से 800 रुपये में। थाईलैंड के टाइगर टेंपल का यही क्रेज दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचता है।
शहर के टाइगर लवर्स भी इसमें पीछे नहीं है। उसी टाइगर टेंपल में जहां हाल ही में बाघ के शावकों के करीब 40 शव फ्रीजर में बंद मिले, कई बेशकीमती अंगों की बड़ी खेप के अलावा दर्जनों की संख्या में बाघ सीमेंट की जेलों में कैद मिले।
ऐसे में जब वहां टाइगर टेंपल में अवैध ट्रेडिंग बंद किए जाने की खबर के बीच वहां रेगुलर विजिट करने वाले शहर के कई टाइगर लवर्स को लगी तो उन्होंने अमर उजाला के साथ शेयर किया कि कैसे वहां कम कीमत में ही टाइगर्स को दुलारने के लिए होड़ लगी रहती है।
टाइगर टेंपल ही नहीं थाईलैंड में चल रहे ऐसे कई वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में अक्सर घूमने जाने वाले टाइगर लवर्स की मानें तो उन्हें वहां घूमने के दौरान वहां चलने वाली ऐसी किसी गतिविधि के बारे में अहसास भी नहीं हुआ।
700-800 रुपये में टाइगर सेल्फी, लोग दिन भर घूमते हैं
पेशे से चिकित्सक और वाइल्ड लाइफ प्रेमी शहर के डॉ. शोभित गुप्ता ने बताया कि वो अब तक दो बार वहां की विजिट कर चुके हैं। 360 भाट (थाई मुद्रा) करीब 700 भारतीय मुद्रा में आप टाइगर के साथ खेल सकते हैं। फोटो वगैरह की सारी सुविधाएं।
दिसंबर 2015 में तो बकायदा एक घंटे तक टाइगर के साथ खेला। आप से खेल कर टाइगर अपनी कमाई कर रहे हैं, खुराक भर रहे हैं, ऐसे में बुरा क्या है। अगर वहां कुछ अवैध चल रहा तो दो बार की विजिट के दौरान न ही उन्हें और न ही उनके साथ गए साथियों को ऐसा कुछ अहसास हुआ।
फिल्म अभिनेता-रंगकर्मी रतन सिंह राठौड़ ने बताया कि वे पिछले पांच सालों में 3 बार टाइगर टेंपल की विजिट कर चुके हैं। टाइगर्स वहां आपकी गोद में आने को बेकरार हैं, आप उन्हें किसी भी तरह से दुलार कर सकते हैं। घुमा सकते हैं। सेल्फी ले सकते हैं। वे खुद अपनी कमाई करते हैं, लेकिन जैसा कि मीडिया रिपोर्ट में दर्शाया गया कि वे शायद हल्के नशे में रहे हों, ऐसा उन्हें कभी भी नहीं लगा। वे आपको रिएक्ट करते हैं, दुलार करते हैं।
लेकिन एक बड़े कदकाठी के धारीदार डॉग की तरह। आप सुबह पहुंच जाइये दिन भर उनके साथ अपने टिकट के चुकाए मूल्य में टाइगर को पुचकारते रहिये। अब चूंकि उनका पेट भरा है, वे बचपन से आदमियों के साथ रह रहे हैं और उनके बीच पले हैं तो वे अटैक ही नहीं करते।
बाघों के मामलों के जानकारी बाघ संरक्षण विशेषज्ञ संजय नारायन के मुताबिक पिछले डेढ़ दशकों के दौरान उन्होंने टाइगर्स को पालने और उनका कॉमर्शियली यूज करने के नए तरीके ईजाद किए।
करीब एक दशक पहले विजिट कर चुके संजय ने बताया कि इसके लिए उन्हें जरूर कुछ नियमों में छेड़छाड़ करनी पड़ी होगी, तभी वहां की सरकार ने इतनी बड़ी कार्रवाई की। हालांकि अकेले टाइगर टेंपल ही नहीं वहां ऐसे दर्जनों छोटे-बड़े जू हैं, जहां टाइगर्स जबरदस्त संख्या में पले हैं।