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Lucknow News: देश में हर 10 में से तीन व्यक्तियों को थाइराइड की समस्या
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लखनऊ। केजीएमयू में इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आनंद मिश्रा के मुताबिक देश में हर 10 में से तीन व्यक्तियों को थाइराइड की समस्या है। हार्मोन में गड़बड़ी से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। वे शुक्रवार को शताब्दी फेज-2 में विभाग की कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा, लोगों में थाइराइड को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। रोबोटिक सर्जरी के आने से प्रभावी इलाज भी मिल रहा है। यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा रहती है। गले पर निशान पड़ने से महिलाएं थाइराइड ग्रंथि की सर्जरी कराने में संकोच करती हैं। हालांकि, रोबोटिक सर्जरी से गर्दन पर निशान नहीं पड़ते। कई बार कांख में चीरा लगाकर यह सर्जरी की जाती है, जिससे ऊपर निशान नहीं दिखाई देता।
डॉ. कुलरंजन ने कहा, किसी महिला को 40 साल की उम्र के बाद अचानक कब्ज की समस्या शुरू हो जाए तो उसे थाइराइड की जांच जरूर करानी चाहिए। इससे अनियमित मासिक धर्म, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द, चेहरे पर पीलापन या शुष्क त्वचा, अवसाद की समस्या हो सकती है।
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अब सर्जरी में कम लग रहा समय
यूएसए के इंडोक्राइन एक्सपर्ट डॉ. कुआन यंग डूह ने बताया कि जो ऑपरेशन चार घंटे में होते थे, वे रोबोटिक सर्जरी से डेढ़ से दो घंटे में हो जाते हैं। आस्ट्रेलिया से आए इंडोक्राइन सर्जन डॉ. जेम्स ली ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से ऑपरेशन की सफलता दर 96 प्रतिशत रहती है। चार प्रतिशत तकनीकी समस्या हो सकती है। मौके पर एम्स दिल्ली के पूर्व डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर से ब्रेस्ट ऑकोप्लास्टिक व एंडोक्राइन सर्जन डॉ. रिजुता अफले मौजूद रहीं।
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डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा, लोगों में थाइराइड को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। रोबोटिक सर्जरी के आने से प्रभावी इलाज भी मिल रहा है। यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा रहती है। गले पर निशान पड़ने से महिलाएं थाइराइड ग्रंथि की सर्जरी कराने में संकोच करती हैं। हालांकि, रोबोटिक सर्जरी से गर्दन पर निशान नहीं पड़ते। कई बार कांख में चीरा लगाकर यह सर्जरी की जाती है, जिससे ऊपर निशान नहीं दिखाई देता।
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डॉ. कुलरंजन ने कहा, किसी महिला को 40 साल की उम्र के बाद अचानक कब्ज की समस्या शुरू हो जाए तो उसे थाइराइड की जांच जरूर करानी चाहिए। इससे अनियमित मासिक धर्म, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द, चेहरे पर पीलापन या शुष्क त्वचा, अवसाद की समस्या हो सकती है।
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अब सर्जरी में कम लग रहा समय
यूएसए के इंडोक्राइन एक्सपर्ट डॉ. कुआन यंग डूह ने बताया कि जो ऑपरेशन चार घंटे में होते थे, वे रोबोटिक सर्जरी से डेढ़ से दो घंटे में हो जाते हैं। आस्ट्रेलिया से आए इंडोक्राइन सर्जन डॉ. जेम्स ली ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से ऑपरेशन की सफलता दर 96 प्रतिशत रहती है। चार प्रतिशत तकनीकी समस्या हो सकती है। मौके पर एम्स दिल्ली के पूर्व डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर से ब्रेस्ट ऑकोप्लास्टिक व एंडोक्राइन सर्जन डॉ. रिजुता अफले मौजूद रहीं।