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केजीएमयू को प्रतिष्ठित यूसी चक्रवर्ती समेत तीन अवॉर्ड
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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के ताज में एक और नगीना जड़ गया है। संस्थान के रेजीडेंट को जहां प्रतिष्ठित यूसी चक्रवर्ती अवॉर्ड दिया गया है, वहीं शिक्षकों को बेस्ट रिसर्च पेपर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
विवि के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के रेजीडेंट डॉ. निरपेक्ष त्यागी को यह उपलब्धि उनके द्वारा यूरीन की थैली से यूरनी वापस नली में जाने के मामलों में रोकथाम के लिए विकसित की गई तकनीक पर हासिल हुई है। इसके अलावा इसी विभाग के डॉ. आनंद पांडेय और डॉ. नितिन पंत को बेस्ट पेपर श्रेणी में अवॉर्ड मिला है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि ये अवॉर्ड ई-आईएपीएससीओएन 2021 में प्रदान किए गए। यूसी चक्रवर्ती अवॉर्ड चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध करने वाले 35 वर्ष आयु तक के शोधकर्ता को दिया जाता है। पीडियाट्रिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन कुरील के दिशा-निर्देशन में यह शोध हुआ। इसमें उन मामलों पर शोध किया गया, जिनमें व्यक्ति की यूरीन की थैली से पेशाब वापस यूरीन की नली में जाने लगती है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता है। ऐसा होने की सूरत में ऑपरेशन से इलाज किया जाता है। डॉ. निरपेक्ष त्यागी ने स्लॉटर हाउस में काटे गए बकरों में से पांच के अंग निकालकर यह शोध किया। इसमें उन्होंने नई तकनीक विकसित की है, जिससे इसे रोका जा सकेगा।
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मुंह की झिल्ली से विकसित की पेशाब की नली
इसी तरह डॉ. नितिन पंत द्वारा पेशाब की नली नीचे की ओर होने पर उसे मुंह की झिल्ली से बनाए जाने पर शोधपत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें वीडियो द्वारा दिखाया गया कि किस तरह से मुंह की झिल्ली पेशाब की नली बनाने पर आसानी से चिपक सकती है।
दवाएं न करें काम तो खून की गांठों पर इंजेक्शन भी कारगर
इसी तरह पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. आनंद पांडेय के पेपर को विविध पेपर की श्रेणी में सम्मानित किया गया। इसमें उन्होंने जन्मजात बच्चों में खून की गांठों का इलाज इंजेक्शन से होने के बारे में बताया। बच्चों में हेमैंजीओमा नाम की बीमारी होने पर कई बार उनको दी जाने वाली दवाएं कारगर साबित नहीं होती हैं। ऐसे में इंट्रालेसिनल स्टेरॉयड इंजेक्शन देकर उनका इलाज किया जा सकता है। इसको उन्होंने अपने रिसर्च पेपर के माध्यम से बताया। जिसे विविध श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।
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विवि के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के रेजीडेंट डॉ. निरपेक्ष त्यागी को यह उपलब्धि उनके द्वारा यूरीन की थैली से यूरनी वापस नली में जाने के मामलों में रोकथाम के लिए विकसित की गई तकनीक पर हासिल हुई है। इसके अलावा इसी विभाग के डॉ. आनंद पांडेय और डॉ. नितिन पंत को बेस्ट पेपर श्रेणी में अवॉर्ड मिला है।
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केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि ये अवॉर्ड ई-आईएपीएससीओएन 2021 में प्रदान किए गए। यूसी चक्रवर्ती अवॉर्ड चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध करने वाले 35 वर्ष आयु तक के शोधकर्ता को दिया जाता है। पीडियाट्रिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन कुरील के दिशा-निर्देशन में यह शोध हुआ। इसमें उन मामलों पर शोध किया गया, जिनमें व्यक्ति की यूरीन की थैली से पेशाब वापस यूरीन की नली में जाने लगती है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता है। ऐसा होने की सूरत में ऑपरेशन से इलाज किया जाता है। डॉ. निरपेक्ष त्यागी ने स्लॉटर हाउस में काटे गए बकरों में से पांच के अंग निकालकर यह शोध किया। इसमें उन्होंने नई तकनीक विकसित की है, जिससे इसे रोका जा सकेगा।
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मुंह की झिल्ली से विकसित की पेशाब की नली
इसी तरह डॉ. नितिन पंत द्वारा पेशाब की नली नीचे की ओर होने पर उसे मुंह की झिल्ली से बनाए जाने पर शोधपत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें वीडियो द्वारा दिखाया गया कि किस तरह से मुंह की झिल्ली पेशाब की नली बनाने पर आसानी से चिपक सकती है।
दवाएं न करें काम तो खून की गांठों पर इंजेक्शन भी कारगर
इसी तरह पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. आनंद पांडेय के पेपर को विविध पेपर की श्रेणी में सम्मानित किया गया। इसमें उन्होंने जन्मजात बच्चों में खून की गांठों का इलाज इंजेक्शन से होने के बारे में बताया। बच्चों में हेमैंजीओमा नाम की बीमारी होने पर कई बार उनको दी जाने वाली दवाएं कारगर साबित नहीं होती हैं। ऐसे में इंट्रालेसिनल स्टेरॉयड इंजेक्शन देकर उनका इलाज किया जा सकता है। इसको उन्होंने अपने रिसर्च पेपर के माध्यम से बताया। जिसे विविध श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।