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42 साल पुराने मामले में विधायक समेत तीन आरोपी दोषमुक्त
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कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में विधायक को किया दोषमुक्त
- फोटो : ??? ?????
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लखनऊ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट करने और गालीगलौज के 42 साल पुराने मामले में विधायक रविदास मेहरोत्रा समेत तीन आरोपियों को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीष श्रीवास्तव ने दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन आरोपों को साबित नहीं कर पाया। मामले में अभियोजन ने केवल एक गवाह कोर्ट में पेश किया है, वहीं वादी की मौत हो गई और अन्य गवाहों के पता नहीं चलने पर अभियोजन के साक्ष्य का अवसर समाप्त किया गया था।
पत्रावली के अनुसार, मामले की रिपोर्ट आठ फरवरी 1979 को सहायक रजिस्ट्रार लखनऊ विश्वविद्यालय डीपी दीक्षित ने हसनगंज में दर्ज कराई थी।
इसमें कहा गया था कि छह फरवरी को रविदास मल्होत्रा और 40 अन्य लोग रजिस्ट्रार बिल्डिंग में घुस आए और गालीगलौज कर स्टाफ के साथ मारपीट की। तोड़फोड़ के दौरान रजिस्टर भी फाड़ दिए।
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मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने 18 नवंबर 1979 को रविदास मेहरोत्रा, बृजेंद्र अग्निहोत्री एवं अनिल कुमार सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।
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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन आरोपों को साबित नहीं कर पाया। मामले में अभियोजन ने केवल एक गवाह कोर्ट में पेश किया है, वहीं वादी की मौत हो गई और अन्य गवाहों के पता नहीं चलने पर अभियोजन के साक्ष्य का अवसर समाप्त किया गया था।
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पत्रावली के अनुसार, मामले की रिपोर्ट आठ फरवरी 1979 को सहायक रजिस्ट्रार लखनऊ विश्वविद्यालय डीपी दीक्षित ने हसनगंज में दर्ज कराई थी।
इसमें कहा गया था कि छह फरवरी को रविदास मल्होत्रा और 40 अन्य लोग रजिस्ट्रार बिल्डिंग में घुस आए और गालीगलौज कर स्टाफ के साथ मारपीट की। तोड़फोड़ के दौरान रजिस्टर भी फाड़ दिए।
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मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने 18 नवंबर 1979 को रविदास मेहरोत्रा, बृजेंद्र अग्निहोत्री एवं अनिल कुमार सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।