अपना दल के आशीष को मंत्री न बनाकर योगी ने दिया दबाव में न आने का संदेश, इस नेता को बढ़ाया आगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंत्रिपरिषद के विस्तार में जातीय समीकरण साधने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संकेत देने की भी कोशिश की है कि भाजपा अब सहयोगी दलों के दबाव में नहीं आएगी। इसके बजाय भाजपा अपने पिछड़े नेताओं को ही आगे बढ़ाएगी, उनके समाज में पकड़ मजबूत करेगी।
माना जा रहा है कि इस रणनीति के तहत सहयोगी अपना दल (एस) के एमएलसी व पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल को मंत्रिपरिषद विस्तार में स्थान नहीं मिल पाया है।
मंत्री बनाए जाने वालों में आशीष के नाम की चर्चा तो जरूर थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनके नाम पर सरकार और भाजपा संगठन ने विचार ही नहीं किया था। लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह अपना दल (एस) की संरक्षक अनुप्रिया पटेल ने केंद्र में और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने प्रदेश सरकार में मंत्री होने के बाद भी भाजपा नेतृत्व पर दबाव बनाकर अपनी बात मनवाने की कोशिश की थी, उसके मद्देनजर भाजपा नेतृत्व ने तय किया है कि पार्टी के ही काडर कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाए।
केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट मना कर दिया था
सूत्रों की मानें तो योगी मंत्रिपरिषद विस्तार के मुद्दे पर दिल्ली में हुई चर्चा में आशीष के नाम पर चर्चा हुई थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट मना कर दिया था। इस दौरान कई नेताओं ने सुझाव दिया था कि कुर्मी बिरादरी के कई ऐसे भाजपा विधायक हैं, जिन्हें आगे बढ़ाकर उनके समाज को पार्टी के साथ जोड़ा सा सकता है। काफी विचार के बाद ही भाजपा ने अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर के मड़िहान से विधायक रमाशंकर पटेल के नाम को आगे बढ़ाया था।
सियासी हलकों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक रमाशंकर को मंत्री बनाकर भाजपा ने अनुप्रिया व आशीष को कड़ा संकेत दिया है कि पार्टी अब किसी दबाव में नहीं आएगी।
ओमप्रकाश राजभर की विदाई के बाद अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाकर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी के भीतर ही पिछड़े नेताओं को मजबूत करेंगे।