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नवाबों की नहीं, यह लक्ष्मण की नगरी है : रामभद्राचार्य
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संगीतमय श्रीराम कथा में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ।
लखनऊ। लखनऊ नवाबों की नगरी नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण की पावन नगरी है। अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण यह शहर देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। यह बात जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन बुधवार को कही।
उन्होंने कहा कि बड़े मंगल की परंपरा और यहां आयोजित होने वाले विशाल भंडारे लखनऊ की गहरी आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। कथा के दौरान कहा कि जब-जब संसार में अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान सज्जनों की रक्षा तथा दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। भगवान राम का अवतार भी धर्म की स्थापना और मर्यादा की रक्षा के लिए हुआ था। उनका जीवन संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत है।
कथा के क्रम में उन्होंने भारतीय संविधान पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान में ''इंडिया दैट इज भारत'' के स्थान पर ''भारत दैट इज इंडिया'' होना चाहिए था। साथ ही उन्होंने संविधान निर्माण प्रक्रिया और मनुस्मृति के संदर्भ में भी अपने विचार रखे।
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कथा के मध्य रामभद्राचार्य ने कई भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। जय श्रीराम और जय-जय हनुमान के उद्घोषों से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। इस अवसर पर कृषि विपणन एवं उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, ब्रजकिशोर गुप्ता, राकेश पांडेय, श्यामजी अग्रवाल, रवि तिवारी, सुनील अग्रवाल और डॉ. अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि बड़े मंगल की परंपरा और यहां आयोजित होने वाले विशाल भंडारे लखनऊ की गहरी आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। कथा के दौरान कहा कि जब-जब संसार में अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान सज्जनों की रक्षा तथा दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। भगवान राम का अवतार भी धर्म की स्थापना और मर्यादा की रक्षा के लिए हुआ था। उनका जीवन संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत है।
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कथा के क्रम में उन्होंने भारतीय संविधान पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान में ''इंडिया दैट इज भारत'' के स्थान पर ''भारत दैट इज इंडिया'' होना चाहिए था। साथ ही उन्होंने संविधान निर्माण प्रक्रिया और मनुस्मृति के संदर्भ में भी अपने विचार रखे।
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कथा के मध्य रामभद्राचार्य ने कई भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। जय श्रीराम और जय-जय हनुमान के उद्घोषों से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। इस अवसर पर कृषि विपणन एवं उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, ब्रजकिशोर गुप्ता, राकेश पांडेय, श्यामजी अग्रवाल, रवि तिवारी, सुनील अग्रवाल और डॉ. अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

संगीतमय श्रीराम कथा में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ।