यादव सम्मेलन कर सपा के वोट बैंक में सेंध लगाएगी भाजपा, महागठबंधन से निपटने का ये हैं पूरा प्लान
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मिशन 2019 में फतह के लिए जातियों की गोलबंदी में जुटी भाजपा ने पिछड़ों की लामबंदी से जिलों में भी सियासी किलेबंदी मजबूत करने की तैयारी की है। इसकी जिम्मेदारी राजधानी में हो रहे अलग-अलग जातियों के सम्मेलनों में आने वाले प्रतिनिधियों पर रहेगी।
पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के फैसले को भी लोकसभा चुनाव में वोटों की गणित ठीक करने में इस्तेमाल किया जाएगा। लोकसभा के सभी क्षेत्रों में सांसदों के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतीकात्मक सम्मान से भी चुनावी चौसर सजाई जाएगी।
सपा व बसपा के गठबंधन से बनने वाली चुनावी गणित की काट के लिए भाजपा ने अगड़ों के साथ पिछड़ों व दलितों की पुख्ता लामबंदी की कोशिश की है। रणनीतिकार लोकसभा की लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाना चाहते हैं। कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर 51 प्रतिशत मतों का लक्ष्य सौंपा गया है। राजधानी में चल रहे सामाजिक सम्मेलन भी इसी का हिस्सा हैं।
चुनावी लिहाज से प्रदेश में पिछड़ों की 54 प्रतिशत आबादी बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने में सक्षम है। भाजपा इनमें से ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़कर गठबंधन की गणित कमजोर करना चाहती है।
ये है पूरी तैयारी
भाजपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के साथ पिछड़ों को उनके कल्याण के लिए किए गए अन्य काम बताने का फैसला किया है। इसकी जिम्मेदारी सामाजिक सम्मेलनों के प्रतिनिधियों को सौंपी जाएगी। इन प्रतिनिधियों को जिलों में बनने वाली कमेटी में भी शामिल किया जाएगा, जो आगे होने वाले सम्मेलनों में आएंगे।
कमेटी प्रत्येक जिले में पिछड़ों के सम्मेलन आयोजित करेगी। इसमें जिले के प्रत्येक गांव से कम से कम एक व्यक्ति की भागीदारी कराई जाएगी। आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से पिछड़ों को होने वाले लाभ की जानकारी सम्मेलन में दी जाएगी। साथ ही मोदी का प्रतीकात्मक सम्मान करते हुए स्थानीय सांसद को सम्मानित किया जाएगा।
काशी में पीएम मोदी का सम्मान
तारीख नहीं तय है, लेकिन रणीतिकारों की योजना काशी में बड़ी सभा करने की है। इसमें सभी जिलों के पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधियों की तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान कराने की तैयारी है। इनकी तारीखें जल्द ही तय हो जाएंगी।
इस रणनीति के तहत भी हो रही है किलेबंदी
सम्मेलनों से जुड़े भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बाबूराम बताते हैं कि राजधानी में हो रहे सम्मेलनों में प्रत्येक जिले से उस जाति के पांच-पांच प्रतिनिधि आमंत्रित किए जा रहे हैं। ये लोग जिलों में पिछड़ों को बताएंगे कि उनके कल्याण के लिए भाजपा सरकारों ने क्या-क्या काम किए। निषाद जो कुछ बताते हैं, उससे भगवा टोली की दूरगामी रणनीति का पता चलता है।
अमूमन लोकसभा के एक क्षेत्र में विधानसभा के पांच क्षेत्र होते हैं। राजधानी में हो रहे सम्मेलनों में आने वाले पांच प्रतिनिधि विधानसभा के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस तरह भाजपा विधानसभा के प्रत्येक क्षेत्र के लिए औसतन 30 पिछड़े नेताओं की टीम खड़ी कर लेगी।
बाद में लोस व विस क्षेत्रों के सम्मेलनों में इसी फॉर्मूले पर लोगों को बुलाया जाएगा। इससे गांव तक पिछड़ों की एक टीम खड़ी करने की कोशिश होगी।
इन तारीखों पर इन जातियों के सम्मेलन
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक शनिवार व रविवार को दिल्ली में होने के कारण लखनऊ के सम्मेलन स्थगित रहेंगे। सोमवार 10 सितंबर को हलवाई, 12 को पटेल, कुर्मी व सचान, 13 को गिरि, गोस्वामी व गोंसाई, 14 को चौरसिया, 15 को यादव, 16 को जायसवाल, 17 को जाट व गूजर, 18 को दरजी और 19 को स्वर्णकार समाज के सम्मेलन तय किए गए हैं। शेष जातियों के सम्मेलनों की तारीखें भी तय की जा रही हैं।