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'बयान बहादुर' दे रहे धर्मांतरण मुद्दे को हवा

Wed, 17 Dec 2014 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 17 Dec 2014 09:23 AM IST
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These leaders give hike to religion conversion issue.

सूबे में बयान बहादुर ही धर्मांतरण मुद्दे को हवा दे रहे हैं। कम से कम विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धर्म जागरण विभाग जैसे संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी जो कुछ बताते हैं, उससे तो यही सामने आता है कि आगरा की घटना ने कुछ छुटभैया नेताओं को हिंदूवादी चेहरा बनने के लिए बयानबाजी का मौका मुहैया करा दिया है।

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बयान बहादुरों की ये बातें भगवा टोली के वरिष्ठ लोगों को क्षुब्ध करने लगी है। पर, मामला हिंदुत्व से जुड़ा होने के कारण वे इस पर खुलकर कुछ बोलना नहीं चाहते। उन्हें इस बात पर संतोष है कि इस विवाद से धर्मांतरण पर विरोधी दलों को घेरने का मौका तो मिल ही गया। धर्मांतरण पर चर्चा व बहस भी शुरू हो गई।
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विश्व हिंदू परिषद की धर्म प्रसार समिति के राष्ट्रीय प्रमुख धर्मनारायण कहते हैं, मुसलमान व ईसाई से वापस हिंदू बनने वालों की मदद करना व उन्हें इसका अवसर मुहैया कराना संगठन के नियमित कामकाज का हिस्सा है। पर, यूपी में कहीं इस तरह का बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ है, इसकी जानकारी हमें नहीं।

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धर्मांतरण का मुद्दा सिर्फ मीडिया में हैं

These leaders give hike to religion conversion issue.

हिंदू जागरण मंच के काशी प्रांत के अध्यक्ष दिनेश नारायण सिंह भी गाजीपुर या वाराणसी सहित पूर्वांचल में ऐसे आयोजनों की जानकारी से इन्कार करते हैं। संघ के धर्म जागरण विभाग से जुड़े रामचंद्र पांडेय कहते हैं जो कुछ है, वह सब मीडिया में है। इन बातों को आधार बनाएं तो प्रदेश के कई स्थानों पर ईसाइयों व मुसलमानों को पुन: हिंदू बनाने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रमों के दावों की जमीन खोखली दिखाई देने लगती है।

जो विहिप ढांचा गिरने के बाद अपने कार्यक्रमों व सम्मेलनों में भीड़ के लिए तरसने लगी हो। जिसके जिला सम्मेलनों की कहीं कोई चर्चा न हो पा रही हो, भीड़ जुटाने में पसीना छूट रहा हो, अयोध्या से नेपाल के जनकपुरी तक जाने वाली राम बारात में भीड़ का टोटा रहा हो, उस संगठन के कुछ लोग अगर हजारों-हजारों लोगों को दोबारा हिंदू बनाने का दावा करें तो उसकी सत्यता को लेकर शक-सुबहा होना स्वाभाविक भी है।

धर्मनारायण कहते हैं कि विहिप किसी लोभ या दबाव से धर्मांतरण की विरोधी है। इसीलिए विहिप शुरू से ही धर्मांतरण पर रोक के लिए कानून बनाने की मांग कर रही है। अब तो केंद्र सरकार भी तैयार है। विपक्ष को इस कानून को बनाने में सरकार का सहयोग करना चाहिए। कानून बन जाने के बाद जो गलत तरीके से धर्मांतरण कराएगा, उस पर कार्रवाई होगी। वह कहते हैं कि विहिप कभी जोर-जबर्दस्ती से किसी को हिंदू नहीं बनाती।

इस प्रक्रिया से होती है घर वापसी

These leaders give hike to religion conversion issue.

जानकारी के मुताबिक कानूनी प्रक्रिया में संबंधित परिवारों या व्यक्ति को संबंधित जिलाधिकारी के सामने शपथपत्र देकर घोषणा करनी होती है कि वह स्वेच्छा से अमुक धर्म को स्वीकार करना चाहता है।

जिलाधिकारी जांच कराते हैं कि संबंधित व्यक्ति या परिवार ने जो घोषणा की है, वह किसी दबाव या लोभ में नहीं की है। संतुष्ट होने के बाद वह इसकी अनुमति देंगे। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर सकता है।

अतीत पर नजर डालें तो आजादी मिलने के बाद से अब तक हिंदू धर्म में सबसे बड़ी वापसी कराने के आयोजनों में जो नाम प्रमुख रूप से याद आता है वह स्व. राजा दिलीप सिंह जूदेव का है। वे प्रतिवर्ष जसपुर (छत्तीसगढ़) में घर वापसी का आयोजन करते थे।

यह आयोजन दो दिन का होता था। इसमें ज्यादातर ईसाई बने आदिवासी पुन: हिंदू धर्म में वापसी करते थे।  जूदेव एक-एक व्यक्ति का पैर धोते थे। फिर संस्कार पूर्वक उन्हें वापस हिंदू बनाया जाता था। इससे पहले कानूनी प्रक्रिया की औपचारिकताएं पूरी कराई जाती थीं। इसीलिए आयोजन में प्रशासनिक अधिकारी भी रहते थे।

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