फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   thermal imaging camera will help from fog

खुशखबरीः अब कोहरे की वजह से बिलकुल लेट नहीं होंगी ट्रेनें

Mon, 30 Nov 2015 07:21 PM IST
Updated Mon, 30 Nov 2015 07:21 PM IST
विज्ञापन
thermal imaging camera will help from fog

सर्दियों में कोहरे की मार से ट्रेनों को बचाने के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरे लगाने की योजना है। इनकी मदद से ड्राइवर को डेढ़ किलोमीटर आगे तक का रास्ता साफ नजर आएगा।

विज्ञापन


फिलहाल उत्तर रेलवे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली-पटना राजधानी एक्सप्रेस में इस कैमरे को इन सर्दियों में लगाएगा। प्रयोग सफल रहने के बाद अन्य ट्रेनों में भी इसका इस्तेमाल होगा।
विज्ञापन


प्रत्येक वर्ष जाड़े में कोहरा रेलवे के लिए मुसीबत लेकर आता है। बड़ी संख्या में ट्रेनें अपने गंतव्य पर समय से नहीं पहुंच पातीं। ऐसी दिक्कतों से निपटने के लिए अगले तीन महीनों के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरे से गाड़ियों को लैस करने का निर्णय किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजधानी और शताब्दी जैसी प्रमुख ट्रेनें भी घने कोहरे में 30 से 40 की स्पीड से चलती हैं। थर्मल इमेजिंग कैमरा युक्त इंजन लग जाने से ये ट्रेनें 80 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की स्पीड से चल सकेंगी।

उत्तर रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक इंजन के दोनों ड्राइवरों के लिए अलग-अलग दो कैमरे रहेंगे। इनकी मदद से इंजन में बैठे ड्राइवर को करीब डेढ़ किलोमीटर आगे की हर गतिविधि और सिग्नल की स्थिति की साफ जानकारी हो जाएगी और उसे स्पीड कम नहीं करनी पड़ेगी।

फॉग सेफ डिवाइस के भरोसे चल रही हैं ट्रेनें

thermal imaging camera will help from fog

उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में कोहरे से निपटने के लिए फिलहाल फॉग सेफ डिवाइस का इस्तेमाल हो रहा है। यह पोर्टेबल डिवाइस ड्राइवर के साथ रहती है। लखनऊ मंडल की 198 गाड़ियों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे लगभग 400 मीटर पहले सिग्नल पोस्ट की जानकारी मिल जाती है।

पहले एंटी फॉग एंड कोलिजन डिवाइस के प्रयोग की बात तय हुई थी, जिससे भीषण कोहरे के दौरान भी ट्रेन ड्राइवर के लिए 400 मीटर तक ट्रैक जांचना संभव होता है। इसमें यह व्यवस्था भी थी कि अवरोध की स्थिति में ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाते हैं।

यह डिवाइस ड्राइवर को यह भी बताती है कि सिग्नल कितनी दूर है। इसके मुताबिक वह ट्रेन की रफ्तार तय कर सकता है। इससे कोहरे में ट्रेनों को अनावश्यक तौर पर धीमा रखने से बचने में मदद मिलती है। इसके अलावा अन्य सावधानियों पर भी पूरा ध्यान दिया जा सकता है।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक परीक्षण में करोड़ों खर्च के अलावा सिग्नल सिस्टम में समन्वय न बन पाने के कारण ये उपकरण ट्रेनों में उपयोग नहीं हो पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस उपकरण को कम खर्च में तैयार करने का प्रयोग किया जा रहा है। ट्रेनों में इस डिवाइस का परीक्षण किया गया था, लेकिन इसकी लागत करोड़ों में होने के चलते रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed