{"_id":"67fc05df28601a560a0fd9b6","slug":"there-should-be-no-selfishness-in-friendship-lucknow-news-c-96-1-ame1008-138284-2025-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: मित्रता में नहीं होना चाहिए स्वार्थ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: मित्रता में नहीं होना चाहिए स्वार्थ
Mon, 14 Apr 2025 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 14 Apr 2025 12:13 AM IST
विज्ञापन
भादर के भुचक्वारे में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।-स्रोत : आयोजक
भादर (अमेठी)। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता समानता का संदेश देती है। मित्रता में कभी स्वार्थ नहीं होना चाहिए। मित्र के दुख में साथ खड़े रहकर बिना जताए उसकी मदद करना ही सच्चे मित्र का धर्म है।
ये बातें ब्लॉक के भुचक्वारे मजरे सोनारीकला गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को प्रवाचक आचार्य रितेश महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता और परीक्षित मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए कहीं। प्रवाचक ने बताया कि बाल सखा सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। बाल सखा की दशा देख भगवान श्रीकृष्ण रो पड़े।
उन्होंने अपने सुदामा को सिंहासन पर बैठा कर उनका स्वागत किया। उन्हें बगैर जताए कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। प्रवाचक ने भक्तों से भागवत को अपने जीवन में उतारकर धर्म पथ पर चलने की बात कही। इस दौरान सत्यनारायण मिश्र, राजेंद्र प्रसाद, उग्रसेन, गुरु प्रसाद, बृजेंद्रमणि मिश्र, जगदीश प्रसाद, राजीव कुमार, दिनेश कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये बातें ब्लॉक के भुचक्वारे मजरे सोनारीकला गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को प्रवाचक आचार्य रितेश महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता और परीक्षित मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए कहीं। प्रवाचक ने बताया कि बाल सखा सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। बाल सखा की दशा देख भगवान श्रीकृष्ण रो पड़े।
विज्ञापन
उन्होंने अपने सुदामा को सिंहासन पर बैठा कर उनका स्वागत किया। उन्हें बगैर जताए कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। प्रवाचक ने भक्तों से भागवत को अपने जीवन में उतारकर धर्म पथ पर चलने की बात कही। इस दौरान सत्यनारायण मिश्र, राजेंद्र प्रसाद, उग्रसेन, गुरु प्रसाद, बृजेंद्रमणि मिश्र, जगदीश प्रसाद, राजीव कुमार, दिनेश कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन