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Lucknow News: प्ले स्कूलों पर नहीं लगाम, बच्चों की सुरक्षा से हो रहा समझौता
Wed, 23 Jul 2025 02:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:18 AM IST
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प्ले स्कूलों पर नहीं लगाम, बच्चों की सुरक्षा से हो रहा समझौता
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में किडजी स्कूल की एक मासूम बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर निजी प्ले स्कूलों की कार्यप्रणाली और शासन की उदासीनता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग के तमाम प्रयासों के बावजूद आज भी प्रदेश में हजारों प्ले स्कूल किसी भी नियामक ढांचे से बाहर संचालित हो रहे हैं। आयोग की निवर्तमान सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी के अनुसार, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने वर्ष 2017 में 0-6 वर्ष के बच्चों के संरक्षण के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइन जारी की थीं, जिनमें स्कूल की स्थापना, स्टाफ योग्यता, सुरक्षा मानक, स्वास्थ्य सुविधा, लाइब्रेरी, खेलकूद और मान्यता प्रक्रिया जैसी बातें शामिल थीं।
हालांकि, राज्य स्तर पर इन दिशा-निर्देशों को लागू कराने के प्रयास हर बार ठंडे बस्ते में चले गए। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन किसी ने जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा। (संवाद)
50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे ऐसे प्ले स्कूलों में
प्रदेश में ऐसे प्ले स्कूलों में करीब 50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी देने वाला कोई सिस्टम फिलहाल मौजूद नहीं है। यह चिंता का विषय है कि रेगुलेटरी गाइडलाइन के प्रस्तर 2(डी) के अनुसार प्री-प्राइमरी व नर्सरी स्कूलों की मान्यता का दायित्व आईसीडीएस अधिकारियों का है, लेकिन यूपी में इसका कोई पालन नहीं हो रहा। आयोग का कहना है कि यदि इन स्कूलों को नियमों के दायरे में नहीं लाया गया तो न तो स्थलीय सत्यापन हो सकता है और न ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
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हालांकि, राज्य स्तर पर इन दिशा-निर्देशों को लागू कराने के प्रयास हर बार ठंडे बस्ते में चले गए। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन किसी ने जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा। (संवाद)
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50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे ऐसे प्ले स्कूलों में
प्रदेश में ऐसे प्ले स्कूलों में करीब 50 हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी देने वाला कोई सिस्टम फिलहाल मौजूद नहीं है। यह चिंता का विषय है कि रेगुलेटरी गाइडलाइन के प्रस्तर 2(डी) के अनुसार प्री-प्राइमरी व नर्सरी स्कूलों की मान्यता का दायित्व आईसीडीएस अधिकारियों का है, लेकिन यूपी में इसका कोई पालन नहीं हो रहा। आयोग का कहना है कि यदि इन स्कूलों को नियमों के दायरे में नहीं लाया गया तो न तो स्थलीय सत्यापन हो सकता है और न ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
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