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Lucknow News: सरकारी अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी

Mon, 08 Sep 2025 02:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 02:42 AM IST
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There is a fight for beds in government hospitals
बलरामपुर अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दो-दो बच्चे।
लखनऊ। वजीरगंज की रहने वाली रेशमा को उल्टी की समस्या बढ़ने पर परिजन बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए। वहां एक से डेढ़ घंटे के इलाज के बाद हालत में सुधार हो गया। इस पर डॉक्टरों ने घर ले जाने की सलाह देकर उन्हें छुट्टी दे दी। राजधानी के अस्पतालों में मरीजाें की भीड़ बढ़ने से इन दिनों यह स्थिति आम हो चुकी है।
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सामान्य मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर घर भेजा जा रहा है, ताकि गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा सके। अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी मची है। हाल यह है कि कई जगह एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अस्पतालों में करीब 90 फीसदी बेड भरे हुए हैं। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि मौसमी बीमारी के मरीज बढ़ने से अस्पताल फुल होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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बलरामपुर अस्पताल जिसकी क्षमता 776 बेड की है, इस समय 90 फीसदी भरा हुआ है। इमरजेंसी में रोजाना 150 से 200 मरीज भर्ती हो रहे हैं। मेडिसिन और बाल रोग विभाग पूरी तरह से भरे पड़े हैं। इनमें बुखार समेत दूसरी बीमारी के मरीज भर्ती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बाल रोग विभाग में एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु ने बताया कि न्यूरो सर्जरी और जनरल सर्जरी विभाग में कुछ बेड खाली हैं, लेकिन कुल मिलाकर अस्पताल में सिर्फ 50 बेड ही उपलब्ध हैं।
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इसी तरह 300 बेड वाले लोकबंधु अस्पताल में 275 मरीज भर्ती हैं। रामसागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय के 156 बेड में से सिर्फ 20 बेड ही उपलब्ध हैं। वहीं, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. एसपी सिंह के अनुसार, 176 बेड में से 108 भरे हैं। यहां टीबी एंड चेस्ट विभाग के 28 और आइसोलेशन वार्ड के 16 बेड खाली हैं, जबकि मेडिसिन समेत अन्य विभाग पूरी तरह भर चुके हैं।

मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि मरीजों की यही संख्या बनी रही तो आने वाले दिनों में अस्पतालों की स्थिति और बिगड़ सकती है।

बलरामपुर अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दो-दो बच्चे।

बलरामपुर अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दो-दो बच्चे।

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