लखनऊ। कैसरबाग सि्थत राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में यायावर रंगमंडल की ओर से पुनीत मित्तल के निर्देशन में नाटक ‘नृत्य’ का मंचन किया गया। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह इंडो-कंटेम्पररी डांस थियेटर प्रस्तुति प्रकृति, संघर्ष और जीवन के अनंत चक्र पर आधारित थी। इसमें बिना किसी संवाद के कलाकारों ने लयबद्ध शारीरिक भंगिमाओं से मौन की मुखर अभिव्यक्ति सुनाई। इसके जरिये संदेश दिया कि प्रकृति में मृत्यु अंत नहीं, बल्कि जीवन का नया प्रारंभ है। नाटक की कहानी जल के जन्म से शुरू होकर मछली, हिरण और बाज के अस्तित्व के संघर्ष तक पहुंचती है। शिकार बना हिरण वृक्ष के रूप में पुनर्जन्म लेता है, जो शिकारी बाज का ही आश्रय बनता है। प्रस्तुति में कवि नरेश सक्सेना की कविताओं और शास्त्रीय नृत्य शैलियों का खूबसूरत संगम दिखा। प्रेरणा विश्वकर्मा, प्रियम यादव और वंशिका शर्मा के अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि डॉ. संदीप कुमार रहे।

नाटक नृत्य के मंचन में गूंजी मौन की मुखर अभिव्यक्ति

नाटक नृत्य के मंचन में गूंजी मौन की मुखर अभिव्यक्ति

नाटक नृत्य के मंचन में गूंजी मौन की मुखर अभिव्यक्ति

नाटक नृत्य के मंचन में गूंजी मौन की मुखर अभिव्यक्ति