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घोसी उपचुनाव: एनडीए बनाम इंडिया की पहली परीक्षा, बसपा चुनाव से बाहर, पर उसके वोट बनेंगे निर्णायक

Wed, 30 Aug 2023 08:19 AM IST
रोहित मिश्र सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 30 Aug 2023 08:19 AM IST
सार

उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान के समर्थन में एनडीए के अपना दल (एस), सुभासपा, निषाद पार्टी पूरी ताकत से डटे हैं। वहीं सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को भी कांग्रेस और रालोद ने समर्थन दिया है।

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The strength of the BJP-India alliance will be tested in the Ghosi by-election
अखिलेश यादव ने मंगलवार को घोसी में बड़ी रैली की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट पर हो रहा उप चुनाव महज भाजपा और सपा के बीच की लड़ाई नहीं हैं। लोकसभा चुनाव-2024 से पहले हो रहा उप चुनाव अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बनाम 'इंडिया' (आई.एन.डी.आई.ए) हो गया है। पूर्वांचल की एक छोटी सी सीट पर एनडीए और ‘इंडिया’ के घटक दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। चुनाव के नतीजे जिस के पक्ष में आएंगे, उसका पूर्वांचल में लोकसभा चुनाव तक असर रहेगा। यदि भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली तो न केवल सपा के हाथ से एक सीट छिनेगी, बल्कि पूर्वांचल में लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ होगा। नतीजा सपा के पक्ष में आया तो यूपी में 'इंडिया' को मजबूती मिलेगी।

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उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान के समर्थन में एनडीए के अपना दल (एस), सुभासपा, निषाद पार्टी पूरी ताकत से डटे हैं। वहीं सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को भी कांग्रेस और रालोद ने समर्थन दिया है। चुनावी माहौल से साफ नजर आ रहा है कि चुनाव दो प्रत्याशियों में नहीं, बल्कि दो गठबंधन के बीच है। 4.36 लाख मतदाताओं के जातीय समीकरण ने मुकाबले को कांटे का बना रखा है। भाजपा प्रत्याशी के लिए पूरी योगी सरकार, भाजपा और आरएसएस के वैचारिक संगठन मैदान में डटे हैं। मुख्यमंत्री भी प्रतिदिन वहां की रिपोर्ट ले रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सभा कर चुके हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी वहां डटे हैं।
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अखिलेश खुद उतरे प्रचार के लिए

2022 के विधानसभा चुनाव में घोसी से दारा सिंह ने सपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। उपचुनाव में सपा को अब ये साबित करना है कि, यह सीट उसकी है, न कि दारा सिंह की। इस उपचुनाव की अहमियत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि आजमगढ़ और रामपुर उपचुनाव में प्रचार से दूर रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव मंगलवार को घोसी में चुनाव प्रचार करने पहुंचे। यूपी में सपा की ‘इंडिया’ में मजबूत स्थिति के लिए भी घोसी उप चुनाव जीतना सपा के लिए महत्वपूर्ण है।
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बसपा के मतदाताओं पर है नजर

उप चुनाव में बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा है, न ही किसी भी दल को समर्थन की घोषणा की है। बीते तीन चुनाव के नतीजे बताते हैं कि करीब 90 हजार से अधिक दलित मतदाताओं वाली सीट पर बसपा की पकड़ अब भी मजबूत है। 2022 में यहां बसपा के वसीम इकबाल को 54,248 मत, 2019 के उपचुनाव में बसपा के अब्दुल कय्यूम अंसारी 50,775 वोट और 2017 में बसपा के अब्बास अंसारी 81,295 मत मिले थे।


हार-जीत पर टिका दारा सिंह का राजनीतिक भविष्य

घोसी विधानसभा उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा है। उन्होंने सपा के घोसी विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। चर्चा थी कि वह चुनाव से पहले मंत्री बनाए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दारा सिंह यदि चुनाव जीत गए तो एक बार फिर मंत्री बन जाएंगे। लेकिन, यदि ऐसा नहीं हुआ तो उनका राजनीतिक भविष्य अधर में फंस सकता है। दारा सिंह ने 2022 में 1,08,430 मत प्राप्त किए थे। भाजपा संगठन व सरकार का पूरा समर्थन पाने के बावजूद 2022 का प्रदर्शन कायम रखना ही उनकी सबसे बड़ी चुनौती है।



सपा प्रत्याशी की ताकत

- प्रत्याशी सुधाकर सिंह का स्थानीय होना, सपा को कांग्रेस, रालोद का समर्थन मिलना।
- 90 हजार से अधिक मुस्लिम, 45 हजार से अधिक यादव और 15 हजार से अधिक ठाकुर मतदाता।
- बसपा की ओर से प्रत्याशी नहीं उतरने से मुस्लिम वोट बैंक में सेंध का खतरा कम होना।

सपा प्रत्याशी की कमजोरी

- भाजपा की ओर से दलितों के बीच सपा प्रत्याशी पर दो दलितों की हत्या के आरोप को भुनाना।
- सुभासपा का भाजपा से गठबंधन होना, दलित वोट बैंक में सपा की पकड़ अपेक्षित कमजोर होना।

भाजपा प्रत्याशी की ताकत

- योगी सरकार और सत्तारूढ़ दल का पूरे दमखम से चुनाव में जुटना।
- उप चुनाव से पहले सुभासपा और निषाद पार्टी से भाजपा का गठबंधन।

भाजपा प्रत्याशी की कमजोरी

- दारा सिंह चौहान का घोसी से बाहर का होना।
- साढ़े छह साल में घोसी में चौथे विधानसभा चुनाव से राजनीतिक अस्थिरता से जनता में अंदरूनी नाराजगी।
- सपा के मुस्लिम-यादव फैक्टर का मजबूत होना।

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