'गैंगरेप' के आरोपी पर सनसनीखेज खुलासे!
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मोहनलालगंज के बलसिंहखेड़ा में प्राथमिक विद्यालय में दरिंदगी और महिला की हत्या का आरोपी सिक्योरिटी गार्ड रामसेवक यादव का चाल-चलन ठीक नहीं था। वह झगड़ालू था एक बार तो बदला लेने के लिए उसने एक लड़की का इस्तेमाल किया।
लड़की को भगाने और उसे गायब करने के मामले में वह दो साल मुरादाबाद जेल में रह चुका है। गांव वाले ही नहीं परिवार तक के लोगों ने गलत चाल-चलन के करण उसका सामाजिक बहिष्कार कर रखा है।
पुलिस ने मोहनलालगंज कांड में एक अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड बलसिंहखेड़ा निवासी रामसेवक यादव को गिरफ्तार किया है।
आरोपी को उसी के गांव के लोग नफरत की नजर से देखते हैं। कारण पूछने पर गांव के शिव कुमार सिंह ने चाल-चलन ठीक न होने की बात कही।
पानी तक नहीं पीते थे उसके घर
शिव कुमार सिंह के अनुसार वह गांव की युवतियों व महिलाओं से भी छेड़खानी से बाज नहीं आता था। विरोध करने पर मारपीट पर आमादा हो जाता।
वर्ष 2010 में एक पीड़िता ने उसके खिलाफ मोहनलालगंज में छेड़खानी का मुकदमा दर्ज कराया था। यही नहीं, सिक्योरिटी एजेंसी चलाने वाले उसके भाई के खिलाफ भी पुलिस में इसी से संबंधित शिकायत दर्ज है।
चचेरे भाई राजीव यादव उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया था। उसके घर पानी तक नहीं पीता था। यहां तक कि रामसेवक के परिवार की एक महिला के अंतिम संस्कार तक में राजीव या उसके परिवार के लोग नहीं गए थे।
गांव वाले भी उससे ज्यादा मतलब नहीं रखते थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2011 में लड़की को भगाकर ले जाने और उसे गायब करने के मामले में रामसेवक को जेल हुई थी।
सहकर्मियों से करता था मारपीट
दो साल मुरादाबाद जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा होकर आया और सात हजार की पगार पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली।
निर्माणाधीन अपार्टमेंट में रामसेवक के साथ काम करने वाले भी उसे पसंद नहीं करते थे। उनका कहना है कि आए दिन शराब पीकर मारपीट करता था।
मारपीट से परेशान थे लोग रामसेवक की हरकतों से परिवार के लोग ही नहीं गांव वाले भी आजिज आ चुके थे। ज्यादातर लड़ाई-झगड़ों में वह शामिल रहता था। बताया जाता है कि, हाल ही में रामसेवक का दिनेश नामक युवक से विवाद हो गया।
बदला लेने के लिए रामसेवक ने अपने परिवार की एक युवती को खड़ाकर छेड़खानी का आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा दिया था।
बच्चों से लेकर शिक्षक तक खौफ में
वहीं बलसिंहखेड़ा के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों से लेकर बच्चे तक खौफ में हैं। एक महिला शिक्षक ने बताया कि पढ़ाने तो आती है, मगर विद्यालय के अंदर जाने में डर लगता है।
ऐसे में गांव के मंदिर पर बच्चों को पढ़ाती है। बच्चे भी स्कूल जाने को तैयार नहीं और न ही परिवार के लोग भेजना चाहते हैं। ऐसे में खुले में कक्षाएं चल रही हैं।
ग्रामीणों ने स्कूल के पास झाड़ियों से निकलने वाले शार्टकट रास्ते का प्रयोग ही बंद कर दिया है। सभी की जबान पर एक ही चर्चा है और सभी कह रहे हैं कि रामसेवक की हरकत ने पूरे गांव का सिर झुका दिया।