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Lucknow News: आनंद मठ के मंचन ने भरा जोश
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आनंद मठ के मंचन ने भरा जोश
लखनऊ। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंद मठ’ के कथानक को महज 20 मिनट में इस तरह से प्रस्तुत किया गया कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। मौका था भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से रंगमंडल की नाट्य प्रस्तुति का। बीएनए के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में शुक्रवार शाम मंचित इस नाटक को जिसने भी देखा, जोश से भर गया। देशभक्ति, त्याग और संगठन इस नाटक की आत्मा रही।
भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार की परिकल्पना और निर्देशन में बुने गए इस नाटक की अवधि तो केवल 20 मिनट ही थी लेकिन मंचन ऐसा कि आंख झपकाने तक का मौका नहीं दिया। मंचन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रारंभिक चेतना को जीवंतता से भर दिया। कहानी जमींदार महेंद्र और उनकी पत्नी कल्याणी के गांव छोड़ने से शुरू होती है और संन्यासी विद्रोहियों के उस समूह के इर्द-गिर्द घूमती है जो मातृभूमि को दासी अवस्था से मुक्त करने के लिए अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर देता है। इस कृति से उपजा अमर गीत ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र प्रेम का प्रतीक बनता है और दर्शकों को स्वतंत्रता, आत्मबल और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश भी देता है।
निदेशक बिपिन कुमार ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतेंदु नाट्य अकादमी के रंगमंडल के इस नाटक की प्रस्तुतियां प्रदेश के अन्य जिलों में भी की जाएंगी। आसिफ अली के नाट्यलेख से सुसज्जित नाटक में संगीत शुभदीप राहा का और सह निर्देशन अनिल चौधरी का रहा। प्रकाश डिजाइन गोविंद सिंह यादव का रहा। नाटक में आशुतोष जायसवाल, श्वेता सोंधिया, दिबिश सिंह, राजर्षि रॉय, चैतन्य महाप्रभु, प्रदीप शिवहरे, अर्घ्य सामंता आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं। मुख्य अतिथि के रूप में किरण बिसारिया के साथ ही बीएनए के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
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भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार की परिकल्पना और निर्देशन में बुने गए इस नाटक की अवधि तो केवल 20 मिनट ही थी लेकिन मंचन ऐसा कि आंख झपकाने तक का मौका नहीं दिया। मंचन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रारंभिक चेतना को जीवंतता से भर दिया। कहानी जमींदार महेंद्र और उनकी पत्नी कल्याणी के गांव छोड़ने से शुरू होती है और संन्यासी विद्रोहियों के उस समूह के इर्द-गिर्द घूमती है जो मातृभूमि को दासी अवस्था से मुक्त करने के लिए अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर देता है। इस कृति से उपजा अमर गीत ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र प्रेम का प्रतीक बनता है और दर्शकों को स्वतंत्रता, आत्मबल और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश भी देता है।
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निदेशक बिपिन कुमार ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतेंदु नाट्य अकादमी के रंगमंडल के इस नाटक की प्रस्तुतियां प्रदेश के अन्य जिलों में भी की जाएंगी। आसिफ अली के नाट्यलेख से सुसज्जित नाटक में संगीत शुभदीप राहा का और सह निर्देशन अनिल चौधरी का रहा। प्रकाश डिजाइन गोविंद सिंह यादव का रहा। नाटक में आशुतोष जायसवाल, श्वेता सोंधिया, दिबिश सिंह, राजर्षि रॉय, चैतन्य महाप्रभु, प्रदीप शिवहरे, अर्घ्य सामंता आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं। मुख्य अतिथि के रूप में किरण बिसारिया के साथ ही बीएनए के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी भी मौजूद रहे।

आनंद मठ के मंचन ने भरा जोश
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