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Lucknow : कहीं नई मुसीबत न बन जाए अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, डेंगू ने डराया
Sun, 20 Nov 2022 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 20 Nov 2022 06:27 AM IST
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें इलाज कराने के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ रही है। इसी बीच डेंगू के मामले बढ़ने से समस्या और बढ़ गई है। ऐसे में चिकित्सकों की कमी नई मुसीबत बन सकती है। हालांकि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. लिली सिंह कहती हैं कि जितने डॉक्टर हैं, उनसे अस्पताल को बेहतर तरीके से संचालित किया जा रहा है।
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दरअसल, सरकारी अस्पतालों के 190 चिकित्सकों ने जून में हुए स्थानांतरण के बाद से अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इनमें से कुछ चिकित्सक गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं तो कुछ दाम्पत्य नीति के तहत स्थानांतरण रद्द करने मांग कर रहे हैं। ऐसे में वे अस्पताल जाने के बजाय शासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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इस मामले में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. लिली सिंह का कहना है कि डॉक्टरों का पूरा विवरण शासन को भेजा जा चुका है। स्थानांतरण शासन स्तर से होगा। गौरतलब है कि जून में 2400 से अधिक चिकित्सकों का स्थानांतरण हुआ था। इसको लेकर हुए बवाल के बाद कुछ चिकित्सकों का स्थानांतरण निरस्त कर दिया गया। वहीं बड़ी संख्या में चिकित्सक अभी भी विभिन्न कारणों से अपना स्थानांतरण निरस्त होने का इंतजार कर रहे हैं।
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वहीं, पिछले सत्र में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) के तहत 1009 चिकित्सकों की तैनाती की गई लेकिन इनमें से 229 चिकित्सकों की नियुक्ति निरस्त की जा चुकी है। वहीं कुछ चिकित्सक कार्यभार ग्रहण करने के बाद से गायब हैं।
विभाग में बढ़ा विवाद
एक तरफ बीमारी से परेशान डॉक्टर अपने स्थानांतरण निरस्त होने का इंतजार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उनके सीएमएस आवास खाली करने की नोटिस जारी कर रहे हैं। वेतन पहले ही रोक दिया गया है। ऐसे में इन डॉक्टरों के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में चिकित्सा अधीक्षकों और डॉक्टरों के बीच आए दिन विवाद भी हो रहा है।