Lucknow News: रेपर्टवा फेस्टिवल का दूसरा दिन बना कला और आत्मा के संवाद का साक्षी
शब्द स्टेज पर कवि बादल शर्मा की कविताओं ने माहौल को आत्मीय बना दिया। उनकी रचनाओं में रोजमर्रा की जिंदगी के छोटे-छोटे दृश्य संवेदना और मुस्कान के साथ बड़े भावों के साथ उभरे। इसके बाद द आहवान प्रोजेक्ट के लोकगीतों ने सुरों के सहारे आत्मचिंतन की राह दिखाई।
शाम ढलते ही रंग थियेटर में अभिनेता मानव कौल की संगीतमय दास्तानगोई ‘जो डूबा सो पार’ ने दर्शकों को भीतर तक छू लिया। निर्देशक अजीतेश गुप्ता और मोहित अग्रवाल की कल्पना में सजा यह हिंदी-फारसी नाटक अमीर खुसरो की जीवन-यात्रा, गुरु निजामुद्दीन औलिया से उनके आध्यात्मिक रिश्ते और सूफी प्रेम के संदेश को जीवंत कर गया। कॉमेडी एरिना में स्टैंडअप कॉमेडियन आकाश गुप्ता ने अपनी तेज़-तर्रार टिप्पणियों और आम जिंदगी से जुड़े किस्सों से दर्शकों को हंसी से लोटपोट कर दिया।
ताल साइलेंट डिस्को स्टेज पर डीजे स्किपस्टर के हिपहॉप और इलेक्ट्रॉनिक मिक्स ने युवाओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। हेडफोन में गूंजती धुनों के साथ नाचते कदम... यह दृश्य खुद में एक आधुनिक कला प्रस्तुति सा लगा।
संगीत की ‘बारिश’ में भीगे जज्बात
म्यूजिकल एरिना में अनुव जैन की गायकी ने सर्द रात को और भी मुलायम बना दिया। ‘बारिश’ कार्यक्रम में उनकी आवाज की कोमलता और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जब उन्होंने ‘इनाम’ गाया, तो हर चेहरे पर मुस्कान और तालियों की लय देखने लायक थी। गीतों के बीच उनकी छोटी-छोटी कहानियों ने संगीत को और भी मानवीय बना दिया। वहीं, फेस्टिवल परिसर में फूडजोन, हस्तशिल्प बाजार और बचपन किड्स जोन दिनभर रौनक से भरे रहे।

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