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Lucknow News: पॉलिसी का नहीं किया भुगतान, कंपनी को अब मय ब्याज देनी पड़ेगी रकम
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को बड़ा झटका दिया है। कंपनी को अब उपभोक्ता को ब्याज सहित रकम चुकानी होगी। यह आदेश बीमा पॉलिसी का भुगतान न करने के मामले में आया है।
गोरखपुर के बेतियाहाता निवासी सौरभ बीके पारसराम ने 20 अगस्त 2020 को आयोग में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह यूके में काम करते थे। वर्ष 2012 में कंपनी की एजेंट सचिता मिश्रा ने उन्हें आईएमजी न्यू बेस्ट ईयर प्लान पॉलिसी बेची थी। एजेंट ने तीन साल पूरे होने पर पॉलिसी सरेंडर करने पर रकम लौटाने का वादा किया था। सौरभ ने यूके से भी पॉलिसी की किश्तें जमा की थीं। 15 मार्च 2018 को उन्होंने जमा किए गए 31.82 लाख रुपये मांगे, लेकिन कंपनी ने लौटाने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
कंपनी ने सौरभ पर नियमों के विरुद्ध रकम मांगने का आरोप लगाया था। हालांकि, आयोग ने पाया कि याचिकाकर्ता ने पॉलिसी की सभी शर्तों का पालन किया था। साक्ष्यों को देखते हुए आयोग ने कंपनी को 31.82 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, मानसिक कष्ट के लिए पच्चीस हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दस हजार रुपये भी देने होंगे। यह पूरी रकम कंपनी को एक माह के भीतर चुकानी होगी।
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गोरखपुर के बेतियाहाता निवासी सौरभ बीके पारसराम ने 20 अगस्त 2020 को आयोग में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह यूके में काम करते थे। वर्ष 2012 में कंपनी की एजेंट सचिता मिश्रा ने उन्हें आईएमजी न्यू बेस्ट ईयर प्लान पॉलिसी बेची थी। एजेंट ने तीन साल पूरे होने पर पॉलिसी सरेंडर करने पर रकम लौटाने का वादा किया था। सौरभ ने यूके से भी पॉलिसी की किश्तें जमा की थीं। 15 मार्च 2018 को उन्होंने जमा किए गए 31.82 लाख रुपये मांगे, लेकिन कंपनी ने लौटाने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
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कंपनी ने सौरभ पर नियमों के विरुद्ध रकम मांगने का आरोप लगाया था। हालांकि, आयोग ने पाया कि याचिकाकर्ता ने पॉलिसी की सभी शर्तों का पालन किया था। साक्ष्यों को देखते हुए आयोग ने कंपनी को 31.82 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, मानसिक कष्ट के लिए पच्चीस हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दस हजार रुपये भी देने होंगे। यह पूरी रकम कंपनी को एक माह के भीतर चुकानी होगी।
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