फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   The number was of CUG series, ADG became a soldier, got suspicious and arrested

Lucknow News: सीयूजी सीरीज का था नंबर, एडीजी बन सिपाही को अर्दब में लिया, शक हुआ और धरे गए

Thu, 24 Aug 2023 02:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Aug 2023 02:04 AM IST
विज्ञापन
The number was of CUG series, ADG became a soldier, got suspicious and arrested
लखनऊ। पुलिस अफसर और विधायक बन उगाही करने वाले शातिर सीयूजी सीरीज का मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते थे। ट्रू कॉलर पर एडीजी के नाम से प्रोफाइल बनाई थी।
विज्ञापन

ये नंबर ट्रेस कर सर्विलांस के एक सिपाही ने जब उससे बात की तो उसको अर्दब में लेने का प्रयास किया। जमकर फटकारा और बोला कि सिपाही के पास सरकारी नंबर कैसे है? इससे सिपाही थोड़ा सहमा, लेकिन जब अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उनको शक हो गया। जब मोबाइल नंबर की कुंडली निकाली गई तो आरोपी जद में आ गए और दबोच लिए गए।
एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि आरोपी शैलेंद्र कुमार और रविंद्र कुमार लंबे समय से फरार थे। सर्विलांस टीम ने एक सीयूजी सीरीज का नंबर चिह्नित किया।
विज्ञापन

शक था कि ये नंबर आरोपियों में से किसी एक का है। संपर्क किया तो बात रविंद्र ने की और खुद को एडीजी बताया। सिपाही ने सवाल करने शुरू किए तो वह भड़कता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

नौकरी से हटवाने की धमकी दे दी। एडीसीपी ने बताया कि तभी शक हो गया था कि ये शातिर शख्स है। मोबाइल नंबर की डिटेल निकाली गई तो प्राइवेट शख्स की आईडी पर मिला।
ट्रेस कर पकड़ा गया। एडीसीपी ने बताया कि काफी वर्ष पहले सामान्य लोगों को भी सीयूजी सीरीज के नंबर आवंटित किए जाते थे, ये नंबर आरोपी रविंद्र ने तभी लिया था।

टोल पर रौब से निकलता था, गुर्गे वॉकी टॉकी रखते थे
एसयूवी में वॉकी टॉकी सिस्टम लगवा रखा था। जब वह चलता था दो-तीन गुर्गे साथ में रहते थे। कभी भी वह टोल नहीं भरता था। उसके गुर्गे वॉकी-टॉकी लेकर उतरते थे। गाड़ी में एडीजी के होने की बात कहकर बैरियर खुलवाते थे। ये सैकड़ों बार किया। आरोपी के पास से पुलिस के कई आईडी कार्ड भी बरामद हुए। आरोपियों के खातों में मोटी रकम मिली है। खाते फ्रीज कराए गए हैं।

राह चलते करते थे वसूली का खेल
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह राह चलते भी वसूलते करते थे। सड़क किनारे गाड़ी के भीतर आरोपी बैठे रहते थे। उनके गुर्गे गाड़ियां रुकवाते थे। रविंद्र और शैलेंद्र को पुलिस अफसर बता चेकिंग के नाम पर रकम वसूल करते थे।


पुलिसकर्मी के करीबी हैं, इसलिए थी पूरी जानकारी
आरोपियों के पास से डीजी के सर्कुलर भी बरामद हुए। पूछताछ में बताया कि वह इन सर्कुलर को पढ़कर जानकारियां लेते थे। यदि कभी पुलिस वाले से टकरा जाएं तो विश्वास के साथ बात कर सकें। किसी तर्क में न फंसे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कई पुलिसकर्मी आरोपियों के करीबी हैं। जिनसे उनको पूरी जानकारी मिली है। मोबाइल से कई अहम जानकारियां मिली हैं। कुछ पुलिस अधिकारियों के नंबर व उनसे व्हाट्सएप चैट भी है, जिसकी तस्दीक की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed