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राष्ट्र को बनाना है राममय : रामभद्राचार्य
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माला पहनाते विधायक डॉ. नीरज बोरा। कथा शुरू होने से पहले निकाली गई कलश
लखनऊ। राम केवल पूजा के विषय नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले आदर्श हैं। जब मन में भक्ति, समाज के प्रति संवेदना और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जागता है, तभी रामकथा सार्थक होती है। इसी संदेश के साथ जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लखनऊ में सोमवार को अपनी 1423वीं श्रीराम कथा का शुभारंभ किया और राष्ट्र को राममय बनाने का संकल्प दोहराया।
लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में सोमवार को भव्य कलश व पोथी यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर गाजे-बाजे और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच कथा स्थल तक यात्रा निकाली। विधायक डॉ. नीरज बोरा ने सपरिवार गुरुपाद पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कथा के प्रथम दिवस में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पंचवटी प्रसंग का वर्णन करते हुए लक्ष्मण की ओर से भगवान राम से पूछे गए पांच महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों की व्याख्या की। उन्होंने नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों-श्रवण, कीर्तन, स्मरण और पादसेवन आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि, भक्ति मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन भारत भगवान की कृपा और प्रेम से सुरक्षित एवं सशक्त बना हुआ है। राष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा को प्रत्येक नागरिक का दायित्व बताते हुए उन्होंने भारत को राममय बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
चित्रकूट में गुरुकुलम् की स्थापना 14 जनवरी से
रामभद्राचार्य ने बताया कि अगले वर्ष 14 जनवरी से चित्रकूट में गुरुकुलम् की स्थापना की जाएगी, जहां भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ विश्वभर के लोगों को ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। रामजन्मभूमि प्रकरण और भोजशाला मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन्हें भारतीय सांस्कृतिक चेतना की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्सव संस्था, भारत लोक शिक्षा परिषद, श्यामप्रेमी संघ, बोरा फाउंडेशन व विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में सोमवार को भव्य कलश व पोथी यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर गाजे-बाजे और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच कथा स्थल तक यात्रा निकाली। विधायक डॉ. नीरज बोरा ने सपरिवार गुरुपाद पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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कथा के प्रथम दिवस में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पंचवटी प्रसंग का वर्णन करते हुए लक्ष्मण की ओर से भगवान राम से पूछे गए पांच महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों की व्याख्या की। उन्होंने नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों-श्रवण, कीर्तन, स्मरण और पादसेवन आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि, भक्ति मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन भारत भगवान की कृपा और प्रेम से सुरक्षित एवं सशक्त बना हुआ है। राष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा को प्रत्येक नागरिक का दायित्व बताते हुए उन्होंने भारत को राममय बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
चित्रकूट में गुरुकुलम् की स्थापना 14 जनवरी से
रामभद्राचार्य ने बताया कि अगले वर्ष 14 जनवरी से चित्रकूट में गुरुकुलम् की स्थापना की जाएगी, जहां भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ विश्वभर के लोगों को ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। रामजन्मभूमि प्रकरण और भोजशाला मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन्हें भारतीय सांस्कृतिक चेतना की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्सव संस्था, भारत लोक शिक्षा परिषद, श्यामप्रेमी संघ, बोरा फाउंडेशन व विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माला पहनाते विधायक डॉ. नीरज बोरा। कथा शुरू होने से पहले निकाली गई कलश

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माला पहनाते विधायक डॉ. नीरज बोरा। कथा शुरू होने से पहले निकाली गई कलश