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Lucknow News: कांटों भरा रहा महापौर का तीसरा साल, अपनों से भी रहा पंगा
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महापौर सुषमा खर्कवाल।
लखनऊ। महापौर सुषमा खर्कवाल के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने पर 26 मई को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन प्रस्तावित है। हालांकि, उनका तीसरा वर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों से घिरा रहा। पार्टी के पार्षदों से टकराव, संगठन से मतभेद, नगर आयुक्त के साथ अधिकारों को लेकर विवाद और पार्षद शपथ प्रकरण लगातार चर्चा में रहे। दूसरी ओर, स्वच्छता रैंकिंग में शहर की बड़ी छलांग उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धि मानी जा रही है।
26 मई 2023 को शपथ लेने के बाद महापौर के लिए शुरुआती दो वर्ष अपेक्षाकृत शांत रहे, लेकिन तीसरे वर्ष में कई घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं। शहर की सफाई व्यवस्था निजी कंपनी रामकी को सौंपने के मुद्दे पर भाजपा पार्षदों का विरोध खुलकर सामने आया। सदन की बैठकों में तीखी नोकझोंक हुई और महापौर के खिलाफ धरना तक दिया गया।
वहीं, तत्कालीन नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह के साथ मतभेद भी चर्चा में रहे। नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति की बातें सामने आईं। अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह और ललित कुमार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन को भेजी गई रिपोर्ट ने भी विवाद खड़ा किया। नगर निगम मुख्यालय के गेट पर ताला लगाकर कर्मचारियों और अधिकारियों की उपस्थिति जांचने तथा उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की घटना भी काफी चर्चित रही।
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नगर आयुक्त गौरव कुमार से टकराव
मौजूदा नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ अधिकारों को लेकर महापौर का विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहा। मामला इतना बढ़ा कि शासन और सरकार के वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई, हालांकि अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं माने जा रहे।
संगठन से भी मतभेद
कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव को लेकर महापौर और भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी के बीच भी टकराव हुआ। संगठन की सूची को महापौर ने स्वीकार नहीं किया, जिससे चुनाव में देरी हुई। बाद में महापौर की तय सूची पर ही चुनाव हुए।
भाजपा पार्षदों का विरोध
रामकी कंपनी को सफाई कार्य सौंपने के विरोध में भाजपा के करीब 50 पार्षदों ने प्रदर्शन किया। महापौर कार्यालय के बाहर धरना दिया गया और एक कार्यकारिणी बैठक का बहिष्कार भी किया, जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी।
पार्षद शपथ विवाद
अदालत से निर्वाचित सपा पार्षद ललित तिवारी को शपथ दिलाने में देरी का मामला भी काफी चर्चित रहा। हाईकोर्ट ने इस मामले में नगर निगम के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तक सीज कर दिए थे, जो बाद में शपथ ग्रहण के बाद बहाल हुए। विपक्ष ने जानबूझकर देरी करने के आरोप लगाए। हालांकि, महापौर ने इन आरोपों से इन्कार किया।
महापौर बोलीं- जितना सोचा उससे अधिक शहर के लिए किया
तीन साल के कार्यकाल पर महापौर सुषमा खर्कवाल ने बातचीत में कहा कि जितना सोचा, उससे ज्यादा कर लिया। विकास के लिए कोटा बढ़ाया। शिवरी में कूडे़ का पहाड़ समाप्त कर स्वच्छता रैंकिंग में शहर को तीसरे पायदान पर पहुंचाया। डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीनों को अवैध कब्जे मुक्त कराया। सफाई व्यवस्था में सुधार की नई व्यवस्था लागू कीं। 100 साल से अधिक समय बाद नगर निगम का अपना मुख्यालय होगा, जिसका काम शुरू हो गया है। जोनल कार्यायल भी बनाए जा रहे हैं। कान्हा उपवन की तरह एक और मनोरथा गोशाला बनाई जा रही है। कैसरबाग में चकबस्त कोठी की जमीन पर पार्किंग व जोनल कार्यालय बनाया जा रहा है। अब तक करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य कराए हैं। इस साल भी करीब 500 करोड़ रुपये के कार्य होंगे। सबसे बड़ी बात इन तीन सालों में गृहकर की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
आगे की यह है योजना
महापौर ने कहा कि उनके कार्यकाल के दो और साल है, उसमें कूड़े से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाकर शुरू कराने का लक्ष्य है। इससे शहर को कूड़े से निजात मिलेगी, बिजली संकट में भी कमी आएगी। शहर स्वच्छता रैंकिंग भी और सुधरेगी। इसके अलावा शहर को जलभराव से निजात दिलाना है। पूरे शहर का प्लान बन गया है और काम भी शुरू हो गया है। अवैध कब्जे से खाली कराई गई जमीनों पर उत्सव वाटिका का निर्माण कराया जाएगा।
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26 मई 2023 को शपथ लेने के बाद महापौर के लिए शुरुआती दो वर्ष अपेक्षाकृत शांत रहे, लेकिन तीसरे वर्ष में कई घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं। शहर की सफाई व्यवस्था निजी कंपनी रामकी को सौंपने के मुद्दे पर भाजपा पार्षदों का विरोध खुलकर सामने आया। सदन की बैठकों में तीखी नोकझोंक हुई और महापौर के खिलाफ धरना तक दिया गया।
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वहीं, तत्कालीन नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह के साथ मतभेद भी चर्चा में रहे। नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति की बातें सामने आईं। अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह और ललित कुमार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन को भेजी गई रिपोर्ट ने भी विवाद खड़ा किया। नगर निगम मुख्यालय के गेट पर ताला लगाकर कर्मचारियों और अधिकारियों की उपस्थिति जांचने तथा उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की घटना भी काफी चर्चित रही।
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नगर आयुक्त गौरव कुमार से टकराव
मौजूदा नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ अधिकारों को लेकर महापौर का विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहा। मामला इतना बढ़ा कि शासन और सरकार के वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई, हालांकि अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं माने जा रहे।
संगठन से भी मतभेद
कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव को लेकर महापौर और भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी के बीच भी टकराव हुआ। संगठन की सूची को महापौर ने स्वीकार नहीं किया, जिससे चुनाव में देरी हुई। बाद में महापौर की तय सूची पर ही चुनाव हुए।
भाजपा पार्षदों का विरोध
रामकी कंपनी को सफाई कार्य सौंपने के विरोध में भाजपा के करीब 50 पार्षदों ने प्रदर्शन किया। महापौर कार्यालय के बाहर धरना दिया गया और एक कार्यकारिणी बैठक का बहिष्कार भी किया, जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी।
पार्षद शपथ विवाद
अदालत से निर्वाचित सपा पार्षद ललित तिवारी को शपथ दिलाने में देरी का मामला भी काफी चर्चित रहा। हाईकोर्ट ने इस मामले में नगर निगम के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तक सीज कर दिए थे, जो बाद में शपथ ग्रहण के बाद बहाल हुए। विपक्ष ने जानबूझकर देरी करने के आरोप लगाए। हालांकि, महापौर ने इन आरोपों से इन्कार किया।
महापौर बोलीं- जितना सोचा उससे अधिक शहर के लिए किया
तीन साल के कार्यकाल पर महापौर सुषमा खर्कवाल ने बातचीत में कहा कि जितना सोचा, उससे ज्यादा कर लिया। विकास के लिए कोटा बढ़ाया। शिवरी में कूडे़ का पहाड़ समाप्त कर स्वच्छता रैंकिंग में शहर को तीसरे पायदान पर पहुंचाया। डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीनों को अवैध कब्जे मुक्त कराया। सफाई व्यवस्था में सुधार की नई व्यवस्था लागू कीं। 100 साल से अधिक समय बाद नगर निगम का अपना मुख्यालय होगा, जिसका काम शुरू हो गया है। जोनल कार्यायल भी बनाए जा रहे हैं। कान्हा उपवन की तरह एक और मनोरथा गोशाला बनाई जा रही है। कैसरबाग में चकबस्त कोठी की जमीन पर पार्किंग व जोनल कार्यालय बनाया जा रहा है। अब तक करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य कराए हैं। इस साल भी करीब 500 करोड़ रुपये के कार्य होंगे। सबसे बड़ी बात इन तीन सालों में गृहकर की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
आगे की यह है योजना
महापौर ने कहा कि उनके कार्यकाल के दो और साल है, उसमें कूड़े से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाकर शुरू कराने का लक्ष्य है। इससे शहर को कूड़े से निजात मिलेगी, बिजली संकट में भी कमी आएगी। शहर स्वच्छता रैंकिंग भी और सुधरेगी। इसके अलावा शहर को जलभराव से निजात दिलाना है। पूरे शहर का प्लान बन गया है और काम भी शुरू हो गया है। अवैध कब्जे से खाली कराई गई जमीनों पर उत्सव वाटिका का निर्माण कराया जाएगा।

महापौर सुषमा खर्कवाल।