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Lucknow News: चांद पत्रिका के फांसी अंक में दर्ज है शहीदों का आखिरी दिन

Wed, 13 Aug 2025 02:13 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Aug 2025 02:13 AM IST
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The last day of the martyrs is recorded in the hanging issue of Chand magazine
चांद पत्रिका के फांसी अंक में दर्ज है शहीदों का आखिरी दिन
लखनऊ। आर्ट मदनमोहन मालवीय मार्ग पर स्थित कोकोरो आर्ट गैलरी में लगी अद्भुत प्रदर्शनी दस्तावेज का मंगलवार को आखिरी दिन था। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं समेत अन्य लोग भी पहुंचे। इस प्रदर्शनी में एक दुर्लभ दस्तावेज भी रखा गया है जो 1928 में प्रकाशित चांद पत्रिका के फांसी अंक में प्रकाशित हुआ था। इसमें काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारियों को फांसी दिए जाने के एक दिन पहले की उनकी गतिविधियां दर्ज हैं।
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इस प्रदर्शनी में 124 वर्षों के दौरान हुईं अहम घटनाओं के दस्तावेजों के रूप में प्रकाशित खबरों के अखबारों को प्रदर्शित किया गया है। चांद पत्रिका के विशेष फांसी अंक में काकोरी ट्रेन एक्शन को अंजाम देने वाले चार क्रांतिकारियों अशफाकउल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह के बारे में बहुत रोचक तथ्य दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि इन चारों क्रांतिकारियों ने फांसी से ठीक पहले अपना दिन कैसे बिताया। उस दिन वे किससे मिले और क्या किया। इस अंक में अशफाकउल्ला और रामप्रसाद बिस्मिल की दोस्ती के बारे में भी विस्तार से लिखा गया।
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वंदेमातरम की आधी आवाज आकर रह गई, लोग बोले- फांसी हो गई

काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह को फांसी होने वाली थी, उससे पहले उनके परिवार वाले उनसे मिलने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि चिंता मत करना, भगवान को अपने सभी पुत्रों का ध्यान है। फांसी अंक में इस बात का जिक्र है कि 19 दिसंबर 1927 को जिस दिन रोशन सिंह को फांसी होनी थी, उन्होंने सुबह उठकर स्नान किया और साफ कपड़े पहनकर मूंछों पर ताव देकर निकले। उनके स्वागत के लिए लोग इलाहाबाद में जेल के बाहर पहुंच गए। इस अंक में लिखा गया है कि कुछ देर बाद जेल के अंदर से गाने की आवाज सुनाई दी। सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। गाना समाप्त होने पर वंदेमातरम की आधी आवाज आकर रह गई। जेल के बाहर खड़े लोगों ने कहा- फांसी हो गई।
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बिस्मिल की मां बोलीं- तू रो रहा है, इस कायरता से क्या होगा
चांद के फांसी अंक में इस बात का जिक्र है कि जिस दिन रामप्रसाद बिस्मिल को फांसी दी जानी थी, उससे एक दिन पहले उनकी मां उनसे मिलने पहुंचीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस पर मां ने कहा कि मैं तो समझती थी कि तुमने खुद पर विजय प्राप्त कर ली है पर तुम तो रो रहे हो। बोलीं- मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश पर कुर्बान हो रहा है। जिंदगी भर देश के लिए आंसू बहाने वाला आज अंतिम समय में रो रहा है। बोलीं- इस कायरता से क्या होगा। इस पर बिस्मिल ने कहा कि मां, मैं मृत्यु के डर से नहीं रो रहा हूं। जननी होकर भी तुम मुझे जान न सकीं। मुझे मृत्यु का तनिक भी भय नहीं है। घी को आग के पास लाया जाएगा तो वो पिघलेगा ही। बोले- मैं अपनी मृत्यु से संतुष्ट हूं।

चांद पत्रिका के फांसी अंक में दर्ज है शहीदों का आखिरी दिन

चांद पत्रिका के फांसी अंक में दर्ज है शहीदों का आखिरी दिन

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