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खेत में गन्ना छील रही थी युवती, झाड़ियों में छिपे बाघ ने बना लिया निवाला

Thu, 08 Feb 2018 06:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 08 Feb 2018 06:18 PM IST
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the girl working in agriculture land killed by the tiger
मौके पर पुलिस, इनसेट में मृतका

निशानगांडा रेंज अंतर्गत आजमगढ़पुरवा गांव निवासी एक किसान के खेत में गुरुवार दोपहर में मजदूर गन्ना छील रहे थे। इसी दौरान खेत के अंदर से निकले बाघ ने गन्ना छील रही युवती पर हमला कर दिया।

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उसे चकरोड के निकट झाड़ियों में खींच ले गया। मजदूर शोर मचाते रहे लेकिन बाघ युवती को जिंदा चबा गया। 25 मिनट तक बाघ मौके पर रहा। इसके बाद शोर अधिक होने पर जंगल की ओर गया। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हे। पुलिस ने पहुंचकर शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। लेकिन वन कर्मी नहीं पहुंचे हैं। 
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र अंतर्गत निशानगाड़ा रेंज के चफरिया बाव्जार के घसियजारीपुरा निवासी गीता (19) पुत्री प्यारेलाल मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती थी। गुरुवार सुबह गीता अपनी पड़ोसन संगीता व अन्य मजदूरों के साथ आजगढ़पुरवा गांव के निकट अशफाक अंसारी के खेत में गन्ना छीलने गई थी।
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दोपहर में दो बजे के आसपास जब सभी मजदूर गन्ना छील रहे थे। तभी बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ी। लेकिन जब तक मजदूर कुछ समझ पाते। तब तक बाघ ने गन्ना छील रही गीता पर हमला कर दिया। उसे 100 मीटर दूर चकरोड के निकट झाड़ियों में खींच ले गया।

हमलास्थल से 20 मीटर की दूरी पर मौजूद संगीता व अन्य मजदूरों ने भागकर जान बचाई। मजदूरों का शोर सुनकर गांव के लोग दौड़े। सभी ने हाका लगाना शुरू किया। लेकिन 25 मिनट तक झाड़ियों की ओट में बाघ गीता को निवाला बनाता रहा। काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए।

शोर अधिक बढ़ा, तब बाघ गीता के शव को छोड़कर जंगल की ओर गया। परिवारीजन भी रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे। बाघ के हमले की सूचना पाकर थानाध्यक्ष अफसर परवेज टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे हैं। रेंज कार्यालय को सूचना दी गई। लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। काफी इंतजार करने के बाद देर शाम पुलिस ने गीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

वनकर्मियों के न पहुंचने से गुस्सा हैं ग्रामीण

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दहशत में ग्रामीण।

बाघ के हमले में दम तोड़ने वाली गीता की खबर ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय पर घटना के तुरंत बाद दी। लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इस पर ग्रामीणों में काफी आक्रोश रहा। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सभी को समझा बुझाकर शांत किया।

काफी गरीब है परिवार, पिता हल्द्वानी में करता मजदूरी

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मृतका।

बाघ का निवाला बनी गीता का परिवार काफी गरीब है। परिवार में गीता के माता-पिता के अलावा उसके चार भाई और चार बहन हैं। ऐसे में मेहनत मजदूरी का ही सहारा है। गीता भी मेहनत मजदूरी कर परिवार का हाथ बंटाती थी। उसकी मौत के बाद मां राजरानी पछाड़े खा-खाकर गिर रही हैं। वहीं भाई-बहन की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे। गीता के पिता प्यारेलाल हल्द्वानी में मजदूरी करते हैं। दोपहर बाद घटना की सूचना पिता को फोन से दी गई तो वह फोन पर ही बिलख पड़े।

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