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अगले सत्र से आधार बेस्ड हाजिरी होने पर ही शुल्क भरपाई, केंद्र ने लागू की कड़ी शर्तें
Tue, 29 Dec 2020 07:44 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 29 Dec 2020 07:44 PM IST
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रुपये
- फोटो : pixabay
अगले सत्र से आधार बेस्ड हाजिरी होने पर ही शुल्क की भरपाई होगी। छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में एससी छात्रों के लिए 60 फीसदी शेयर देने के फैसले के साथ ही केंद्र ने कड़ी शर्तें लागू की हैं। इसके तहत शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2024 तक नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) और नेशनल असिस्टमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (नैक) की ग्रेडिंग भी लेनी होगी। हर साल लाभ लेने वाले 10 फीसदी छात्रों का रैंडम सत्यापन भी कराया जाएगा।
एससी छात्रों के लिए इस योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी राशि देगी। अब तक केंद्र सरकार पिछली पंचवर्षीय योजना के आखिरी साल जितनी राशि इस मद में खर्च की गई, उससे ज्यादा राशि की डिमांड आने पर उस अंतर का केंद्र सरकार भरपाई करती थी। वर्तमान में प्रदेश में एससी छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए 1948 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसमें से 1180 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी।
फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
घपले रोकने के लिए कड़े नियम भी बनाए गए हैं। विद्यार्थियों की शिक्षण संस्थानों में बायोमीट्रिक हाजिरी लगेगी। यह हाजिरी उनके आधार से लिंक होगी। यानी, आधार के थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) से उपस्थिति दर्ज करने पर ही किसी भी शिक्षण संस्थान को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस तरह से देखा जाए कि विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से 75 फीसदी उपस्थिति पूरी करने पर ही भुगतान होगा। यह व्यवस्था सत्र 2021-22 से लागू होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नए सत्र से भुगतान भी आधार लिंक करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यूपी में ये प्रयोग इसी सत्र से शुरू कर दिया गया है।
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एससी छात्रों के लिए इस योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी राशि देगी। अब तक केंद्र सरकार पिछली पंचवर्षीय योजना के आखिरी साल जितनी राशि इस मद में खर्च की गई, उससे ज्यादा राशि की डिमांड आने पर उस अंतर का केंद्र सरकार भरपाई करती थी। वर्तमान में प्रदेश में एससी छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए 1948 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसमें से 1180 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी।
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फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
घपले रोकने के लिए कड़े नियम भी बनाए गए हैं। विद्यार्थियों की शिक्षण संस्थानों में बायोमीट्रिक हाजिरी लगेगी। यह हाजिरी उनके आधार से लिंक होगी। यानी, आधार के थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) से उपस्थिति दर्ज करने पर ही किसी भी शिक्षण संस्थान को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस तरह से देखा जाए कि विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से 75 फीसदी उपस्थिति पूरी करने पर ही भुगतान होगा। यह व्यवस्था सत्र 2021-22 से लागू होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नए सत्र से भुगतान भी आधार लिंक करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यूपी में ये प्रयोग इसी सत्र से शुरू कर दिया गया है।
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छात्रों का होगा रैंडम सत्यापन
सभी शिक्षण संस्थानों से कहा गया है कि वे एनबीए और नैक के मानक पूरा कर लें, क्योंकि योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें वर्ष 2024 तक इन संस्थाओं से ग्रेडिंग हासिल करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक वर्ष थर्ड पार्टी से योजना के तहत दी गई राशि का ऑडिट भी कराया जाएगा। जिला, ब्लॉक व ग्राम स्तर पर योजना का लाभ लेने वाले 10 फीसदी छात्रों का रैंडम सत्यापन भी हर साल होगा। खास बात यह है कि छात्रवृत्ति के राज्य पोर्टल पर जो डाटा अपलोड या अपडेट होगा, वो तत्काल भारत सरकार के पोर्टल पर भी दिखने लगेगा।
एक फरवरी तक देनी होगी डिमांड
केंद्र सरकार ने एससी छात्रों को 60 फीसदी शेयर देने का प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। राज्य सरकार को इस मद में एक फरवरी तक अपनी डिमांड भेजनी होगी। जितनी राशि राज्य सरकार छात्रों को खातों में भेजेगी, उसके आधार पर अपने हिस्से की गणना करते हुए केंद्र भी सीधे छात्रों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करेगी।
एक फरवरी तक देनी होगी डिमांड
केंद्र सरकार ने एससी छात्रों को 60 फीसदी शेयर देने का प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। राज्य सरकार को इस मद में एक फरवरी तक अपनी डिमांड भेजनी होगी। जितनी राशि राज्य सरकार छात्रों को खातों में भेजेगी, उसके आधार पर अपने हिस्से की गणना करते हुए केंद्र भी सीधे छात्रों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करेगी।