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Lucknow News: सफाई के लिए बड़ी ही सफाई से बढ़ेगा 50 करोड़ रुपये का खर्च
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शहर के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर तक सड़क किनारे से नहीं उठा था कूड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ। शहर की साफ-सफाई का हाल संतोषजनक नहीं है। सड़कों पर खुले में कूड़ा डालने की शिकायतें आम हैं। इन सब के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च को बड़ी ही सफाई से बढ़ाने की तैयारी हो गई है। इसके लिए महंगाई की आड़ ली जा रही है।
शहर में अभी दो निजी कंपनियों से सफाई कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जा रहे हैं। अब सफाई खर्च में करीब 50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके लिए फाइल तेजी से दौड़ रही है और खर्च बढ़ाने को लेकर उच्च स्तर पर सैद्धांतिक सहमति भी बन गई है।
शहर के 110 वार्ड हैं। इनमें 77 वार्डों में सफाई एवं कूड़ा उठान का काम हैदराबाद की कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान (रामकी) को दिया गया है। शेष 33 वार्डों में लायंस एनवायरो कंपनी काम कर रही है। कंपनियों से हुए अनुबंध के तहत घरों से कूड़ा एकत्र करने और उसे शिवरी प्लांट तक पहुंचाने के लिए नगर निगम अभी 3031 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से भुगतान कर रहा है। इसके अलावा नालियों और सड़कों की सफाई के लिए 787 रुपये प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाता है। इस तरह रामकी को हर महीने करीब 15 और लायंस एनवायरो को करीब 12 करोड़ रुपये का भुगतान होता है। दोनों कंपनियों को नगर निगम सालाना करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान करता है।
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बजट बढ़ाने के लिए दिए गए ये तर्क
डीजल-पेट्रोल के दाम और मजदूरी में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए सफाई के बजट में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की मांग की गई है। कंपनी का तर्क है कि पहले अकुशल मजदूर की सरकारी मजदूरी 388 रुपये प्रतिदिन थी जो अब बढ़कर 422 रुपये हो गई है। ऐसे में कूड़ा प्रबंधन पर आने वाला खर्च (टिपिंग फीस) बढ़ाना जरूरी है।
काम कम लेकिन पहले से ज्यादा भुगतान
जानकारों ने बताया कि रामकी से पहले शहर में सफाई का काम चीन की कंपनी इकोग्रीन एनर्जी के पास था। उसे घरों से कूड़ा एकत्र करने, उसको शिवरी प्लांट ले जाकर मशीनों से उसका निस्तारण करने एवज में 1604 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से भुगतान किया जाता था। अब रामकी कंपनी को घरों से कूड़ा एकत्र करने और शिवरी प्लांट तक पहुंचाने के लिए ही 3031 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है। शिवरी प्लांट का संचालन अब दूसरी कंपनी करती है जिसे नगर निगम अलग से भुगतान करता है। ऐसे में रामकी को आधे काम के लिए ही पहले की तुलना में करीब दो गुना भुगतान किया जा रहा है। यह खर्च अब और बढ़ेगा।
लगातार लगते रहे हैं आरोप मगर सुनवाई नहीं
रामकी कंपनी पर लगातार आरोप लगते रहे हैं। काम में लापरवाही पर आए दिन कंपनी पर जुर्माना भी लगता रहता है। इसके बाद भी नगर निगम में एक धड़ा इस कंपनी को ज्यादा से ज्यादा काम दिलाने के लिए जोर लगाता रहा है। दूसरा धड़ा इसके खिलाफ है लेकिन संख्या बल में कम होने के कारण उसकी नहीं चलती। खास यह भी है कि कंपनी के साथ भुगतान की दरों को लेकर भी कभी समीक्षा नहीं की गई। आरोप है बहुत सी कंपनियां कम दर पर ज्यादा काम करने का तैयार हैं लेकिन जानबूझ कर रामकी को काम दिया जाता है। यदि नगर निगम काम की गुणवत्ता का मूल्यांकन करे, सफाई एवं कूड़ा एकत्रीकरण और उसकी ढुलाई की दरों की समीक्षा करे तो सालाना बजट में बड़ी बचत की जा सकती है।
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जो नियमों में होगा उसी आधार पर काम होगा। टिपिंग फीस बढ़ाने के संदर्भ में पहले कंपनी से अनुबंध की शर्तों को देखा जाएगा। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- पंकज श्रीवास्तव,
अपर नगर आयुक्त
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पेट्रोल-डीजल की दर और न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी के आधार पर ही कंपनी ने नगर निगम से टिपिंग फीस बढ़ाने की मांग की है। यह बढ़ोतरी अनुबंध के अनुसार ही होगी।
- अभय रंजन,
परियोजना प्रमुख, लखनऊ स्वच्छता अभियान कंपनी
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शहर में अभी दो निजी कंपनियों से सफाई कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जा रहे हैं। अब सफाई खर्च में करीब 50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके लिए फाइल तेजी से दौड़ रही है और खर्च बढ़ाने को लेकर उच्च स्तर पर सैद्धांतिक सहमति भी बन गई है।
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शहर के 110 वार्ड हैं। इनमें 77 वार्डों में सफाई एवं कूड़ा उठान का काम हैदराबाद की कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान (रामकी) को दिया गया है। शेष 33 वार्डों में लायंस एनवायरो कंपनी काम कर रही है। कंपनियों से हुए अनुबंध के तहत घरों से कूड़ा एकत्र करने और उसे शिवरी प्लांट तक पहुंचाने के लिए नगर निगम अभी 3031 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से भुगतान कर रहा है। इसके अलावा नालियों और सड़कों की सफाई के लिए 787 रुपये प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाता है। इस तरह रामकी को हर महीने करीब 15 और लायंस एनवायरो को करीब 12 करोड़ रुपये का भुगतान होता है। दोनों कंपनियों को नगर निगम सालाना करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान करता है।
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बजट बढ़ाने के लिए दिए गए ये तर्क
डीजल-पेट्रोल के दाम और मजदूरी में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए सफाई के बजट में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की मांग की गई है। कंपनी का तर्क है कि पहले अकुशल मजदूर की सरकारी मजदूरी 388 रुपये प्रतिदिन थी जो अब बढ़कर 422 रुपये हो गई है। ऐसे में कूड़ा प्रबंधन पर आने वाला खर्च (टिपिंग फीस) बढ़ाना जरूरी है।
काम कम लेकिन पहले से ज्यादा भुगतान
जानकारों ने बताया कि रामकी से पहले शहर में सफाई का काम चीन की कंपनी इकोग्रीन एनर्जी के पास था। उसे घरों से कूड़ा एकत्र करने, उसको शिवरी प्लांट ले जाकर मशीनों से उसका निस्तारण करने एवज में 1604 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से भुगतान किया जाता था। अब रामकी कंपनी को घरों से कूड़ा एकत्र करने और शिवरी प्लांट तक पहुंचाने के लिए ही 3031 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है। शिवरी प्लांट का संचालन अब दूसरी कंपनी करती है जिसे नगर निगम अलग से भुगतान करता है। ऐसे में रामकी को आधे काम के लिए ही पहले की तुलना में करीब दो गुना भुगतान किया जा रहा है। यह खर्च अब और बढ़ेगा।
लगातार लगते रहे हैं आरोप मगर सुनवाई नहीं
रामकी कंपनी पर लगातार आरोप लगते रहे हैं। काम में लापरवाही पर आए दिन कंपनी पर जुर्माना भी लगता रहता है। इसके बाद भी नगर निगम में एक धड़ा इस कंपनी को ज्यादा से ज्यादा काम दिलाने के लिए जोर लगाता रहा है। दूसरा धड़ा इसके खिलाफ है लेकिन संख्या बल में कम होने के कारण उसकी नहीं चलती। खास यह भी है कि कंपनी के साथ भुगतान की दरों को लेकर भी कभी समीक्षा नहीं की गई। आरोप है बहुत सी कंपनियां कम दर पर ज्यादा काम करने का तैयार हैं लेकिन जानबूझ कर रामकी को काम दिया जाता है। यदि नगर निगम काम की गुणवत्ता का मूल्यांकन करे, सफाई एवं कूड़ा एकत्रीकरण और उसकी ढुलाई की दरों की समीक्षा करे तो सालाना बजट में बड़ी बचत की जा सकती है।
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जो नियमों में होगा उसी आधार पर काम होगा। टिपिंग फीस बढ़ाने के संदर्भ में पहले कंपनी से अनुबंध की शर्तों को देखा जाएगा। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- पंकज श्रीवास्तव,
अपर नगर आयुक्त
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पेट्रोल-डीजल की दर और न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी के आधार पर ही कंपनी ने नगर निगम से टिपिंग फीस बढ़ाने की मांग की है। यह बढ़ोतरी अनुबंध के अनुसार ही होगी।
- अभय रंजन,
परियोजना प्रमुख, लखनऊ स्वच्छता अभियान कंपनी

शहर के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर तक सड़क किनारे से नहीं उठा था कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला

शहर के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर तक सड़क किनारे से नहीं उठा था कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला

शहर के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर तक सड़क किनारे से नहीं उठा था कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला